मनीष अग्रहरि
उत्तर प्रदेश में अब आय, जाति,निवास,जन्म व मृत्यु प्रमाण पत्र के बाद खतौनी भी गॉवो में स्थित जनसेवा केन्द्रों के फ्रेंचाइजी के माध्यम से मिल जायेगी इससे अब किसान तहसील कार्यालय का चक्कर खतौनी के लिए नही लगाएगा। जनसेवा केन्द्रों के जरिए किसान इसे आसानी से हासिल कर सकते है। इसकी शुरूआत प्रदेश के कुछ चुनिंदा जिलो के तहसीलो में सोमवार से शुरू हो गई है। प्रशासन ने राजस्व अभिलेखो को आनलाइन करा दिया है, जिन स्थानो पर अभी अभिलेख आनलाइन नही हो पाए है वहॉ पर यह व्यवस्था लागू नही हो पाई है।
सुदूर गॉंवों के किसानो को खतौनी के लिए तहसील दफ्तर आना मजबूरी बन गई थी। यहॉं आए बगैर खतौनी किसानों को नही मिलती थी। प्रदेश सरकार ने अब गॉंव में ही खतौनी मिलने की राह आसान कर दी है। हलॉंकि इसके लिए किसानो को अतिरिक्त कीमत भी चुकानी होगी। तहसील में खतौनी महज 15 रूपए में मिल जाती थी। नई व्यवस्था के तहत जिला प्रशासन ने राजस्व अभिलेखो को आनलाइन करा दिया है। जनसेवा केन्द्रों के जरिए किसान को अपनी भूमि का गाटा व खाता संख्या या फिर किसान का नाम बताकर विभाग की बेबसाइट पर आनलाइन आवेदन करना होगा।
आवेदन करने के दूसरे दिन किसान को यह गॉंव के ही जनसेवा केन्द्र से 30 रूपए सरकारी फीस जमा करने के बाद मुहैया करा दी जाएगी। प्रदेश सरकार की यह सुविधा हलॉकि किसानों को दोगुनी कीमत चुकाने के बाद मिलेगी लेकिन यह महंगी भी नही है। दरअसल में पहले तहसील कार्यालय आने और जाने का किराया देने के साथ ही खतौनी की फीस देनी होती थी। अब गॉंव में ही इसके मिलने से समय बचने के साथ ही किराए का खर्च भी नही लगेगा।
कैसे मिलेगी खतौनीः जनसेवा केन्द्र किसान का डाटा फीड कर आनलाइन आवेदन करेगे। यह आवेदन तहसील कार्यालय से पुष्ट किया जाएगा। इसके बाद राजस्व निरीक्षक के डिजिटल हस्ताक्षर से खतौनी जारी कर दी जाएगी। जनसेवा केन्द्र प्रभारी इसका प्रिंट आउट निकाल कर अपने हस्ताक्षर व मुहर से प्रमाणित कर किसानों को मुहैया कराएगें


