संतोष कुमार सिंह
याद किए गये विश्वनाथ राय.. स्वतंत्रता सेनानी विश्वनाथ राय का राष्ट्र के निर्माण में संसदीय योगदान नामक पुस्तक का लोकार्पण प्रणव मुखर्जी द्वारा किया गया। यह पुस्तक विश्वनाथ राय के पुत्र कर्नल प्रमोद शर्मा द्वारा लिखी गयी है। पुस्तक में विश्वनाथ राय के 25 वर्ष के संसदीय जीवन के दौरान प्रमुखता से उठाये गये मुद्दों को संकलित किया गया है।
नयी दिल्ली: पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने अगस्त क्रांति दिवस के अवसर पर स्वतंत्रता सेनानी और दिवंगत सांसद विश्वनाथ राय की याद में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि जब वे छात्र थे तो उस समय देश के किसी न भाग से आंदोलन की खबरें आती रहती थी। लोग चावल के लिए आंदोलन करते थे। देश में खाद्यान्न संकट था। लेकिन हरित क्रांति ने पूरे देश में खाद्यान्न के परिदृृश्य को बदल दिया। इस वर्ष हमने 270 मिलियन टन का रिकार्ड उत्पादन का लक्ष्य प्राप्त किया है। इस कम्र में प्रणव मुखर्जी ने एक घटना की चर्चा की। उन्होनें कहा कि मैग्नामारा वारा विश्व बैंक के चेयरमैन थे। वे इस बात के लिए प्रयासरत थे कि कैसे तकनीक के जरिए कृषि उत्पादन को बढ़ाया जा सकता है। उस दौरान सी सुब्रमण्यम भारत के कृषि मंत्री थे। मैग्नामारा भारत के दौरे पर आए। उस समय पंजाब व हरियाणा एक ही राज्य था। मैग्नामारा अपने भारत दौरे के क्रम में किसानों से बात करना चाहते थे। वे समझना चाहते थे कि क्या भारतीय किसान नयी तकनीक अपनाएंगे। सी सुब्रमण्यम उन्हें पंजाब के दौरे पर ले गए। उन्होंने कहा कि हमारे किसान भले ही साक्षर नहीं हैं लेकिन ऐसा नहीं है कि वे अशिक्षित हैं। मैग्नामारा ने एक किसान को बुलाया और उससे मिट्टी के विषय में पूछा। किसान ने मिट्टी हाथ में लिया और उसका विश्लेषण करते हुए उन्हें समझाया कि किस मिट्टी में कौन सी फसल बेहतर तरीके से लगायी जा सकती है। मैग्नामारा दंग रह गये। इसी के बाद से विश्व बैंक में स्पेशल डेवलपमेंट असिस्टेंस कार्यक्रम बनाया गया जिससे खेती के विकास को मदद की जा सके।
प्रणव मुखर्जी ने कहा कि यह देश उन स्वतंत्रता सेनानियों के पराक्रम से आगे बढ़ा है जिन्होंने न सिर्फ देश को आजादी दिलायी बल्कि आजादी के बाद भारतीय जनजीवन के हरेक क्षेत्र में देश को गढ़ा। चाहे खेती हो या वैज्ञानिक तकनीक हमने हर क्षेत्र में तरक्की की है। स्वतंत्रता सेनानी विश्वनाथ राय के संसदीय जीवन को याद करते हुए मुखर्जी ने कहा कि वैसे तो हर सांसद सदन में यह राय रखता है कि किसानों को उसके उत्पादन का उचित मूल्य मिले। व्यापार संतुलन किसानों के पक्ष में हो। यह बात और है कि हमें अपेक्षाकृत सफलता भले न मिली हो। भारत को 2008 के आर्थिक मंदी से मुकाबला करने में हमारे किसान,वैज्ञानिकों एवं अन्य लोगों का अहम योगदान रहा है। आज जो भारत है उसके निर्माण में विश्वनाथ राय और उन जैसों का महत्वपूर्ण योगदान है।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि मनोज सिन्हा ने विश्वनाथ राय जब चुन कर आए कृषि,गन्ना सिंचाई समय की आवश्यकता थी। उन्होंने इन विंदूओं को संसद में प्रखरता से उठाया। यही कारण है कि उसके बाद जो पंचवर्षीय योजना बनी उसमें उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड को इन क्षेत्रों में विकास के लिए ठीक ठाक राशि मिली। हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा ने कहा कि कृषक के लिए खासकर गन्ने किसानों के लिए संसद में काफी आवाज उठाई। किसानों की वजह से ही पूरे देश का पेट भर रहा है। विश्वनाथ राय ने भारत कृषक समाज के जरिए किसानों के मुद्दों को मजबूती से उठाया।
इस कार्यक्रम में उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी, पूर्व सांसद महाबल मिश्रा। पूर्व सांसद सोना राम सहित कई जाने माने लोगों ने शिरकत की। इस अवसर पर स्वतंत्रता सेनानी विश्वनाथ राया का राष्ट्र के निर्माण में संसदीय योगदान नाम पुस्तक का लोकार्पण प्रणव मुखर्जी द्वारा किया गया। यह पुस्तक विश्वनाथ के पुत्र कर्नल प्रमोद शर्मा द्वारा लिखी गयी है। पुस्तक में विश्वनाथ राय के 25 वर्ष के संसदीय जीवन के दौरान प्रमुखता से उठाये गये मुद्दों को संकलित किया गया है।
कौन थे विश्वनाथ राय
भारत छोड़ो आंदोलन के सेनानी विश्वनाथ राय 1952 से 1977 तक लगातार लोकसभा सांसद रहे। संसद में उन्होंने खेती किसानी के मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। शुरू में उन्होंने ने सदन में कृषि, गन्ना,गेहूं,बागवानी आदि मुद्दे उठाये क्योंकि देश में खाद्यान्न संकट था। गन्ने के शीरे से जैव इंधन बनाने,कृषि उत्पाद बढ़ाने के साथ ही किसानों के लिए पारिश्रमिक मूल्य पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि शहरी क्षेत्र के लोग सस्ते भोजन के पात्र हैं किन्तु किसानों के श्रम के लागत पर नहीं, चूंकि उन्हें उनके उत्पाद का पर्याप्त मूल्य नहीं मिलता। इसके साथ ही उन्होंने पहले व दूसरे पंचवर्षीय योजनाओं में उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में सिंचाई परियोजनाओं के लिए बड़ी निधि प्राप्त करने में सफलता पाई। इसके अलावा भी उन्होंने कई मुद्दे उठाए।

