#EveryChildReading मूवमेंट से जुड़ीं यूनिसेफ इंडिया सेलिब्रिटी एडवोकेट करीना कपूर खान

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  • करीना कपूर खान ने कहा…छोटे बच्चों के लिए पढ़ने और मूलभूत शिक्षा को बढ़ावा देने में मातृभाषा की भूमिका अहम

मुंबई: यह तथ्य किसी से छिपा नहीं है कोरोना के दौरान स्कूलों के बंद रहने और छात्र —शिक्षक प्रत्यक्ष संवाद न हो पाने और बच्चों के बाहर न पाने की विवशता ने न सिर्फ बच्चों के मनो​मस्तिस्क को प्रभावित किया बल्कि स्कूल बंद होने से बच्चों की सीखने की क्षमता पर गंभीर असर हुआ है। इस बाबत कई रिपोर्ट भी सामने आई है कि अध्यापक-छात्र के सीधा संवाद न होने और ऑनलाइन कक्षाओं के प्रभावी ढंग से काम न करने के कारण इसका असर बच्चों के सीखने की क्षमता पर पड़ा है। बच्चों की पढ़ने और लिखने की क्षमता पर असर सीधे तौर पर उसके सर्वागिंण विकास पर होता है।
भाषाई क्षमता पर हुआ प्रभाव
लेकिन बच्चें करें भी तो क्या? पूरे कोरोना काल यहां तक की आगे भी एहतियातन स्कूल न खुलने से छात्र ना सिर्फ अपनी वर्तमान कक्षाओं के सबक को ठीक ढंग से नहीं सीख पाये, बल्कि पिछली कक्षाओं में जो सीखा था, उसे भी भूलने लगे थे। यहां तक की इसका असर बच्चों के भाषाई क्षमता के विकास पर भी हुआ। 92% बच्चे भाषा के मामले में कम-से-कम एक विशेष बुनियादी कौशल को भूल चुके हैं। कक्षा 2 के 92%, कक्षा 3 के 89%, कक्षा 4 के 90%, कक्षा 5 के 95% और कक्षा 6 के 93% छात्रों में यह कमी देखी गई है।

लेकिन कोरोना का खतरा पूरी तरह खत्म भले ही न हुआ हो। हालाकि स्कूल सुचारू रूप से चलने लगे हैं। ऐसे में बच्चो ने जो खोया और बच्चों के पढ़ाई लिखाई विशेष रूप से भाषा संबंधी पाठ्यपुस्तकों को ठीक से न पढ़ पाने की चिंता न सिर्फ अभिभावकों और शिक्षकों को है और न सिर्फ शिक्षा जगत से जुड़े लोग इस बात को लेकर चितित है अपितु यूनिसेफ जैसी संस्थायें भी इसको लेकर चिंतित हैं। लेकिन सिर्फ चिंता से बात नहीं बनने वाली। सवाल आगे की राह का है। और उसी आगे की राह की तलाश में महाराष्ट्र जैसे राज्य में #EveryChildReading मूवमेंट शुरू करने की तैयारी है।

इसी क्रम में बॉलीवुड स्टार और यूनिसेफ इंडिया की सेलिब्रिटी एडवोकेट करीना कपूर खान ने मूलभूत शिक्षा (प्रारंभिक कक्षाओं में) को बढ़ावा देने और राज्य में #EveryChildReading मूवमेंट का समर्थन करने के लिए आज गोरेगांव (पश्चिम), मुंबई में मीठा नगर म्युनिसिपल स्कूल का दौरा किया जो अप्रैल 2023 में लॉन्च किया जाएगा।क्या कहा करीना कपूर खान ने

शिक्षकों और प्राइमरी कक्षा के बच्चों के साथ संवाद करते हुए करीना कपूर खान ने सबसे पहले समस्या की जड़ को टटोलने में रूची दिखाई। बातचीत के क्रम में उनकी दिलचस्पी इस बात को लेकर दिखी कि महामारी के दौरान और उसके बाद बच्चों ने कैसे सीखने की प्रक्रिया को अपनाया। इस दौरान करीना ने इस बात को रेखांकित किया कि बच्चों के लिए जल्दी पढ़ना, लिखना और गिनना सीखना कितना महत्वपूर्ण है। उन्होंने इस तथ्य पर जोर दिया बच्चों की मातृभाषा में सीखने के विकल्प प्रदान करने का क्या महत्व है। वे बच्चों के साथ उस सत्र में संवाद किया जिसमें मज़ेदार कहानी सुनाने के जरिए उनकी कल्पना शीलता को परखा जा सके और इसके लिए एक इंटरैक्टिव कहानी भी पढ़ी।
इस दौरान करीना कपूर खान ने बच्चों के बीच बिताये गये अपने अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि “आज मैं छोटे बच्चों से मिली और पढ़ने और सीखने के लिए उनमें अपार उत्साह देखी। एक माँ के रूप में, मैं पढ़ने और कहानी कहने की शक्ति को समझती हूँ जो युवा दिमाग को और प्रेरित कर सकता है, खासकर अगर यह ऐसी भाषा में हो जिसे वे अच्छी तरह से समझते हैं,”

ऐसा माहौल बनाने की ज़रूरत जहां बच्चे सीखना पसंद करें
करीना कपूर खान ने कहा कि “हमें ऐसा माहौल बनाने की ज़रूरत है जहां बच्चे सीखना पसंद करेंगे। स्कूल एक ऐसी जगह है और घर में सीखने का माहौल भी उतना ही महत्वपूर्ण है। हमें इन जगहों को बच्चों के पढ़ने के लिए सहायक और दिलचस्प बनाने की जरूरत है। शिक्षक, माता-पिता, दादा-दादी, सभी छोटे बच्चों को ऐसे कौशल सीखने में मदद कर सकते हैं जो उन्हें जीवन भर मदद करेंगे।

क्या कहती है राष्ट्रीय शिक्षा नीति
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 भी इस बात पर प्रकाश डालती है कि अंकों के साथ लिखने और बुनियादी ज्ञान अर्जन करने व इसे समझने के साथ पढ़ने की क्षमता ‘भविष्य की सभी स्कूली शिक्षा और आजीवन सीखने के लिए आवश्यक आधार और एक अनिवार्य शर्त है।’ इसके परख के लिए चलाये जा रहे रीडिंग विद अंडरस्टैंडिंग एंड न्यूमेरसी (एनआईपीयूएन) मिशन का उद्देश्य 2026-27 तक ग्रेड 3 तक प्रत्येक बच्चे के लिए साक्षरता और संख्या ज्ञान में सार्वभौमिक दक्षता के लक्ष्य को प्राप्त करना है।

नवंबर 2021 में किए गए राष्ट्रीय मूल्यांकन सर्वेक्षण के अनुसार, महाराष्ट्र में ग्रेड 3 में 30 प्रतिशत से अधिक बच्चे छोटे पाठ पढ़ने में असमर्थ हैं। ग्रेड 5 तक, यह संख्या 41 प्रतिशत तक बढ़ जाती है, जो बच्चे अपने ग्रेड स्तर के लिए उपयुक्त पाठ नहीं पढ़ पाते हैं और ग्रेड 8 में 43 प्रतिशत हो जाते हैं।
राज्य सरकार और यूनिसेफ की परस्पर साझेदारी
वर्ष 2020 में शिक्षा विभाग, महाराष्ट्र सरकार द्वारा यूनिसेफ और प्रथम बुक्स के साथ साझेदारी में शुरू किया गया। इसके तहत पढ़ने का अभियान, गोष्ठी शनिवार (या रीडिंग सैटरडे) बच्चों को उनकी भावनात्मक लगाव और सुरक्षा को बढ़ावा देने के साथ-साथ उनकी भाषा प्रवीणता का समर्थन के लिए हर हफ्ते एक कहानी की किताब प्रदान करता है। इस अभियान के तहत मराठी, उर्दू और अंग्रेजी में प्रत्येक शनिवार को कक्षा 1-8 के छात्रों के साथ एक-एक कहानी साझा की जा रही है। अभियान ने महाराष्ट्र के सभी 36 जिलों को कवर किया और 1 लाख से अधिक स्कूलों, 2.6 लाख शिक्षकों और 31 लाख बच्चों तक पहुंचा।

क्या कहती हैं यूनिसेफ महाराष्ट्र प्रमुख
यूनिसेफ महाराष्ट्र की चीफ राजेश्वरी चंद्रशेखर ने कहा, “यह आवश्यक है कि हम मूलभूत शिक्षा पर ध्यान केंद्रित करें और अपने बच्चों को जीवन में सफल होने के लिए आवश्यक बुनियादी कौशल से लैस करें। इसमें पढ़ना, लिखना और बुनियादी संख्यात्मक कौशल शामिल हैं। गोष्ठीचे शनिवार रीडिंग कैंपेन और #EveryChildReading मूवमेंट जैसे पहल के माध्यम से, हम राज्य के प्रत्येक नागरिक को प्रत्येक बच्चे के पढ़ने को सुनिश्चित करने में अपनी भूमिका निभाने के लिए प्रेरित कर सकते हैं। एक मजबूत नींव के साथ, बच्चे न केवल कहानियों के जादू का आनंद ले सकते हैं, बल्कि यह भी उनकी पूरी क्षमता को अनलॉक करें और भविष्य में कामयाब हों।”

बच्चों के मुद्दों को उजागर करने में करीना कपूर खान की भूमिका अहम

यूनिसेफ इंडिया की कम्युनिकेशन एडवोकेसी एंड पार्टनरशिप प्रमुख ज़ाफरीन चौधरी ने कहा कि “ यूनिसेफ की तरफ से आज के कार्यक्रम के लिए समय निकालने के लिए करीना कपूर खान की सराहना करते हैं। बच्चों को आनंद के साथ पढ़ने के लिए प्रोत्साहित करने और बच्चों को सीखने का माहौल प्रदान करने में सहयोग करने उनकी भूमिका अहम है। साथ ही  उन्होंने यूनिसेफ इंडिया की तरफ से करीना कपूर खान के साथ एक सेलिब्रिटी एडवोकेट के रूप में जुड़ाव की सराहना की और कहा कि पिछले एक दशक में बच्चों के मुद्दों को उजागर करने में उनके समर्थन को यूनिसेफ बहुत महत्व देता है।

उल्लेखनीय है कि बच्चों के लिए काम करने वाली संस्था यूनिसेफ राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर सरकार के साथ मिलकर काम करता रहा है और शिक्षा मंत्रालय द्वारा विकसित मूलभूत शिक्षा के लिए राष्ट्रीय दिशानिर्देशों के लिए तकनीकी इनपुट प्रदान करता है। भारत सरकार के सहयोग से, यूनिसेफ ने मार्च 2022 में देश में किए गए पहले फाउंडेशनल लर्निंग स्टडी का समर्थन किया है। यूनिसेफ मूलभूत साक्षरता और संख्यात्मक मिशन निपुन भारत के लिए अपनी पंचवर्षीय योजनाओं को विकसित करने और कार्यान्वित करने में राज्य सरकारों को तकनीकी सहायता प्रदान करना आगे भी जारी रखेगा।

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