अमरनाथ झा
पटना: वैसे तो बिहार प्रमुख दलहन उत्पादक राज्यों में शामिल नहीं है, लेकिन केंद्र सरकार इस दिशा में राज्य सरकार के साथ तालमेल कर सतत प्रयास कर रही है। और जल्द ही इसके परिणाम भी दिखने लगेंगे। जी हां, केंद्र सरकार ने दलहन बीज उत्पादन के लिए बिहार में नौ केन्द्र (हब) बनाने का निर्णय लिया है। बिहार के बीज हब से मसूर, मूंग, चना, मटर के बीच का गुणवत्तापूर्ण उत्पादन बढाया जाएगा। इन हबों के जरिए न सिर्फ बीज बल्कि बीज का उत्पादन करने वाले किसानों की उपज को बीज के रूप में खरीददारी सुनिश्चित करने का इंतजाम भी सरकार करेगी। किसानों को उनके द्वारा तैयार किये गये बीज की कीमत बाजार भाव से 15 से 20 प्रतिशत अधिक दिया जाएगा। यह केन्द्रीय योजना है। न सिर्फ बिहार में बल्कि केन्द्र सरकार देशभर में डेढ़ सौ दलहन बीज उत्पादन केन्द्र स्थापित करने जा रही है।
केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गयी इस योजना में केन्द्रीय कृषि मंत्रालय ने कृषि विश्वविद्यालयों,आईसीएआर और कृषि विज्ञान केन्द्रों को जोड़ा है। इसका उदेश्य देश में पर्याप्त मात्रा में गुणवत्तापूर्ण बीज का उत्पादन कर किसानों को उपलब्ध कराना और उन्हें बीज उत्पादक बनाना है। दलहन बीज उत्पादन के इस अभियान का नोडल एजेंसी इंडियन इंस्टीच्यूट आफ पल्स रिसर्च को बनाया गया है।
आईसीएआर के पटना स्थित क्षेत्रीय कार्यालय के निदेशक डॉ बीपी भटट के मुताबिक बिहार में आईसीएआर को पटना और बक्सर, सबौर कृषि विश्वविद्यालय को लखीसराय,भागलपुर और मुंगेर, राजेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय को वैशाली और पूर्वी चंपारण तथा तिरहुत कृषि महाविद्यालय को समस्तीपुर में बीज केन्द्र विकसित करने की जिम्मेवारी दी गई है। प्रत्येक हब से वर्ष 2016-17 में 500 क्विंटल, वर्ष 2017-18 में 700 क्विंटल और वर्ष 2018-19 में 1000 क्विंटल बीज उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। प्रत्येक सीड हब को केन्द्र सरकार से डेढ़ करोड रुपए अनुदान मिलेगा। जिसमें से 50 लाख रुपए सीड प्रोसेसिंग और स्टोरेज की व्यवस्था करने पर खर्च किया जाएगा।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद अर्थात आईसीएआर दलहन के उत्पादन को बढ़ाने और नई किस्मों की दालों को विकसित करने के लिए एकीकृत फसल प्रबंधन तकनीकों का उपयोग करने पर जोर दे रही है ताकि उत्पाद स्वास्थ्यप्रद और पोषक तत्वों से भरपूर हो। किसान नई तकनीक और नई किस्में अपनाकर आय और उत्पदकता दोनों बढा सकेंगे। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के अधीन 1700 करोड़ के कुल आवंटन में दलहन के लिए 1100 करोड रुपए का आवंटन किया गया है। इसमें से 15 प्रतिशत नए किस्म के बीजों के उत्पादन के लिए आरक्षित है। दालों का उत्पादन बढाने के लिए दालों की न्यूनतम मूल्य में जबरदस्त बढोतरी की गई है।
