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पंचायत खबर टोली

  • कभी भरती थी तमसा नदी का पेट,अपने आंचल में बसे सैकड़ों गांवों की प्यास बुझाती थी नदी, लेकिन अब हुई बेजान
  • वैज्ञानिकों का दावा, गंगा के अस्तित्व के लिए गंगा बेसिन की नदियों का जीवित रहना जरूरी।

 मऊ: गंगा नदी को बचाने को लेकर रोज बैठक की जाती है। यहां तक की गंगा पुर्नजीवन मंत्रालय भी बनाया गया है। मंत्री उमा भारती लगातार गंगा मार्ग पर घूम रही हैं।  तरह-तरह की योजनाओं की घोषणा रोज की जा रही है लेकिन, गंगा का पेट भरने वाली नदियां खामोशी से मर रही हैं। नदी वैज्ञानिकों ने साफ कर दिया है कि गंगा तब तक नहीं बचेगी जब तक गंगा बेसिन की नदियों को जीवन नहीं मिलेगा।

उप्र के अंबेडकर नगर जिले के टांडा ताल से निकलकर लाटघाट होते हुए 50 किलोमीटर का सफर तय कर मऊ के सहरोज त्रिमुहानी घाट पर मिलने वाली छोटी सरयू नदी कभी अपने आंचल में बसे सैकड़ों गांवों की प्यास बुझाती थी लेकिन, अब यह नदी खुद ही प्यासी है। बिना चीख-पुकार के छोटी सरयू मर रही है और शासन-प्रशासन उदासीन बना हुआ है।  आजमगढ़ से होकर निकलने वाली इस नदी का अधिकांश हिस्सा मऊ जिले में पड़ता है। पिछली सरकार में इस नदी की सफाई के लिए तकरीबन 15 करोड़ रुपये के बजट का प्रस्ताव तैयार कर आजमगढ़ बाढ़ खंड के जरिए शासन को भेजा गया था। किसान नेता देवप्रकाश राय ने बताया कि प्रस्ताव आज भी शासन में लंबित है। जनहित में इस नदी की खोदाई और सफाई जरूरी है। श्री गंगा-तमसा सेवा मिशन के संस्थापक ज्ञानेंद्र मिश्र ने बताया कि इस नदी के लिए भी प्रधानमंत्री को पत्र भेजा गया है लेकिन, वहां से अभी तक कोई जवाब नहीं आया है।

 क्या है नदी के सूखने का असर

उत्तर प्रदेश के पूर्वी इलाके में बहने वाली छोटी सरयू नदी के 50 किलोमीटर के दायरे में मऊ जिले के सैकड़ों गांव आबाद हैं। निकटतम गांवों में सहरोज, काछीकला, हिकमा, इटौरा डोरीपुर आदि गावों के नागरिकों ने कहा कि कई वर्षो से इस नदी में पानी न होने के दुष्परिणाम अब गांवों में दिखाई देने लगे हैं। नदी के आसपास के बागीचे सूखने और उजड़ने लगे हैं। वन्यजीवों की संख्या कम होने लगी है। भूगर्भ जल का स्तर लगातार नीचे की ओर खिसकने लगा है।

क्या कहते हैं ग्रामीण

काछीकला के पूर्व ग्राम प्रधान रामकरन चौहान, इटौरा डोरीपुर के ग्राम प्रधान रामप्रताप यादव आदि ने बताया कि छोटी सरयू के मैदान में जो कुएं पहले साल भर प्यास बुझाते थे, अब किसी में पानी नहीं है। कई हैंडपंप पानी देना बंद कर दिए हैं। (दैनिक जागरण से साभार)

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