एक फरवरी को वित्तमंत्री अरुण जेटली आम बजट पेश करेंगे। विमुद्रीकरण के बाद यह पहला केंद्रीय बजट होगा। बजट को लेकर आम जनमानस में जहां कौतूहल है, वहीं समाज के अलग—अलग तबके की कुछ उम्मीदें हैं। कृषि प्रक्षेत्र में अरूण जेटली का बजट कैसा होगा..और इस पर हमारे खेती किसानी करने वाले किसानों पर क्या असर होगा इसको लेकर पंचायत खबर के रोविंग एडिटर (अवैतनिक) अमितेश सिंह ने किसानो की राय जानने की कोशिश की। पेश है रिपोर्ट…
गाजीपुर: गाजीपुर के आदर्श गांव के रहने वाले गामा कुशवाहा विगत कई सालों से गंगा तट की बलुई जमीन पर टमाटर, परवल, ककड़ी की फसल उगा रहे हैं। गामा का मानना है कि किसानों को लेकर सरकार की नीतियां जमीनी स्तर पर लागू नहीं हो पाती हैं। सरकारी योजनाआें की प्रक्रियाएं इतनी जटिल हैं कि किसान योजनाआें का लाभ नहीं ले पाता है। सरकारी योजनाआें के औपचारिकताआें को सरलीकृत करने की आवश्यकता है।
किसान राधेश्याम जो कि गामा के साथ ही गंगातट पर विगत कई सालों से फसल उगा रहे हैं, का मानना है कि उन्नति प्रजाति के फल और सब्जियों को उगाने की नस्लों के बारे में जानकारी सहज रुप से नहीं मिल पाती है। कृषि विज्ञान केंद्र जैसी इकाइयां अपने मूल मकसद से भटक गई हैं। प्रशिक्षण केंद्रों को महज कागजी खानापूर्ति तक सीमित कर दिया गया है। केंद्रीय बजट में कृषि विज्ञान केंद्रों की जवाबदेही तय करने पर जोर दिया जाना चाहिए।
जनपद के महराजगंज गांव के रहने वाले चंद्रिका यादव का मानना है कि वित्तमंत्री को किसानों की ऋण को पूर्ण रुप से माफ करने की पहल करनी चाहिए। कृषि ऋण को लेकर बिचौलिये खासे सक्रिय हैं। बैंक और लाभार्थी के बीच बिचौलियों की भूमिका को खत्म करने की आर्थिक नीति बनानी चाहिए।
डेढग़ांवां के रहने वाले श्रीनाथ कहते हैं कि गंगा किनारे के गांव इस वर्ष आई बाढ़ से पूरी तरह प्रभावित रहे, एेसे में किसानों की लागत भी नहीं निकल पाई है। सरकार को खाद, बीज और कृषि संबंधित उपकरणों पर सब्सिडी में इजाफा कर कृषक हितैषी बजट पेश करना चाहिए।
कृषक उमाशंकर का मानना है कि भारत जैसे कृषि प्रधान देश में आज की तारीख में कृषक बिल्कुल हाशिये पर जीवन—यापन करने को मजबुर हैं। ऐसे में केंद्र सरकार को सर्मथन मूल्य के बजाय कृषि उत्पादों का बाजार मूल्य देकर कृषि प्रोत्साहन पर बल देना चाहिए। इस बजट में उम्मीद की जानी चाहिए कि किसानों का विशेष ध्यान रखा जाएगा।

प्रगतिशील किसान संजय चतुर्वेदी का कहना है कि आये दिन खेती से जुड़ी सामाग्री एवं उपकरणों का दाम बढ़ता जा रहा है। एेसे में उपकरणों पर सब्सिडी देने के साथ ही कम ब्याज दर पर कृषि ऋण देने, ऋण सीमा बढ़ाने की पहल केंद्रीय बजट में की जानी चाहिए।
कृषकों की उपयुक्त मांगों और उम्मीदाें पर वित्त मंत्री जेटली का बजट कितना खरा उतरेगा, इस प्रश्न का उत्तर तो एक फरवरी को उस वक्त मिलेगा, जब देश की सबसे बड़ी पंचायत ‘संसद’ में केंद्रीय बजट पेश किया जाएगा।
