27/09/2021
  • 27/09/2021

केन्द्रीय टीम ने माना बिहार को बाढ़ से हुआ भारी नुकसान

By on 15/11/2016 0 461 Views

अमरनाथ झा
पटना: बाढ़ से हुए नुकसान का जायजा लेने आई केन्द्रीय टीम ने माना कि बाढ से इस बार बिहार में भारी नुकसान हुआ है। गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव अजय रमेश सुले के नेतृत्व में आई सात सदस्यीय टीम ने भागलपुर-नौगछिया,समस्तीपुर, पटना और अरवल जिलों का दौरा करने के बाद राज्य के अधिकारियों के साथ बैठक की। स्थल निरीक्षण, आमलोगों से बातचीत के बाद अधिकारियों के साथ बैठक में विडियो क्लिपिंग और विभिन्न विभागों की ओर से पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन हुए।

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बिहार के आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव प्रत्यय अमृत ने मीडिया से बातचीत में कहा कि, टीम को उन जगहों पर ले जाया गया जहां बाढ से हुए नुकसान के चिन्ह अब तक मौजूद हैं। ध्वस्त स्कूल और सडक, तबाह खेत और फसल,क्षतिग्रस्त घर एवं अन्य निर्माण दिखाए गए। टीम ने पहले समर्पित ज्ञापन के कतिपय बिन्दुओं पर विस्तृत जानकारी मांगी। जिसे सात दिनों के भीतर भेज देने की बात है।

उल्लेखनीय है कि बिहार की बाढ का जायजा लेने के लिए केन्द्रीय टीम का दौरा दो बार रद हो जाने पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने केन्द्र सरकार की मंशा पर कटाक्ष करते हुए केन्द्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह को पत्र लिखा था। उस पत्र का असर हुआ और सात सदस्यीय टीम दो दिवसीय दौरे पर बिहार आई। इस टीम को बाढ राहत के मद में बिहार सरकार की मांग के औचित्य की समीक्षा करनी है और केन्द्रीय सहायता के बारे में अपनी सिफारिश करनी है। बिहार सरकार ने 22 सितंबर को सौंपे अपने ज्ञापन में 4112 करोड रुपए की सहायता मांगी है।

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बिहार में इस साल चार चरणों में बाढ़ आई। जुलाई में नेपाल में बारिश होने की वजह से गंडक में जबरदस्त बाढ़ आ गईं। पानी के दबाव में गंडक बराज का एक फाटक टेढ़ा हो गया। इस बाढ से नेपाल के सीमावर्ती इलाकों में बाढ और कटाव का प्रकोप अभूतपूर्व रहा। गंडक की बाढ का असर पश्चिम चंपारण और गोपालगंज जिलों में रहा। तो कोशी और महानंदा की बाढ़ से पूर्वी बिहार के जिले डूब गए। कुल मिलाकर 14 जिलों के 78 प्रखंडों में जुलाई महीने में बाढ़ की हालत बन गई। बाद में झारखंड में हुई बारिश की वजह से दक्षिण और मध्यबिहार की नदियां उफन गई। इस बाढ़ का यह आलम रहा कि अंतःसलिला नदी फल्गू में भी उफान आ गया। पुनपुन नदी तो लंबे समय तक उफनाई रही। गंगा में जल विर्सजन नहीं होने से पटना जिले के कई प्रखंड पुनपुन की बाढ़ में डूब गए। मोरहर, हरोहर, किउल आदि दक्षिण बिहार की सभी नदियों में इस साल बाढ आई।

गंगा बिहार के बीचोंबीच से बांटती हुई पष्चिम से पूरब की ओर प्रवाहित है। आमतौर पर उत्तर बिहार के जिले बाढ प्रवण माने जाते हैं और दक्षिण के जिलों को सूखा प्रवण माना जाता है। इसबार यह विभाजन बेकार हो गया। दक्षिण के सूखा प्रवण माने जाने वाले कुछ जिलों में औसत से अधिक वर्षा हुई जबकि उत्तर के बाढ़ प्रवण जिलों में से अधिकांष में सामान्य से कम वारिश हुई। इनमें शिवहर और खगडिया जिले अव्वल है।
शिवहर में औसत से 65 प्रतिशत कम वर्षा हुई। लेकिन नेपाल से आई नदियों के माध्यम से उस जिले में भी बाढ़ आई। सबसे मारक गंगा में आई बाढ रही। मध्यप्रदेश में अत्यधिक वर्षा हुई।
सोन नदी पर बने बाणसागर बांध को बचाने के लिए अचानक बहुत अधिक पानी छोड दिया गया। जानकारी के अनुसार एकाएक 11 लाख क्यूसेक से अधिक पानी
छोडा गया। यह पानी गंगा में आया और गंगा उफन गई। गंगा के उफन जाने का असर अभी तक देखा जा रहा है। गंगा के तटवर्ती सभी जिलों में बाढ़ आई। बाढ़ का पानी शहरी क्षेत्रों के प्रवेश कर गया। पटना, मुंगेर, भागलपुर से लेकर बनारस तक इसका असर देखा गया। नेषनल हाईवे और रेलमार्ग पर खतरा उत्पन्न हो गया। सोन नदी पर बने बाणसागर डैम से पानी आया और पश्चिम बंगाल में बने फरक्का बराज से पानी की निकासी नहीं हुई। इसलिए गंगा और तटवर्ती इलाकों में लंबे समय तक पानी जमा रहा। पटना में 19 अगस्त को गंगा का प्रवाह उच्चतम स्तर से अधिक हो गया और पानी का बढ़ना जारी था। अगले दिन बक्सर से भागलपुर तक जगह जगह गंगा खतरे के निशान से उपर बह रही थी।

वास्तविकता यह भी है कि गंगा की जलधारण क्षमता काफी घट गई है। उसके तल में भारी मात्रा में गाद जमा है। जगह-जगह बालू के टीले उत्पन्न हो गए हैं।थोडा पानी बढने पर भी उसका उफन जाना स्वाभाविक है। इसबार तो अत्यधिक पानी आया था। जिसका प्रकोप पटना-बनारस शहरों पर तो दिखा ही, दूसरे तट के कस्बों और गांवों में कहीं ज्यादा मारक अवस्था रही जिसकी चर्चा भी नहीं हो पाई।

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उल्लेखनीय है कि आपदा मद में राशि देने में केन्द्र सरकार आरंभ से ही टालमटोल करती रही है। बिहार सरकार ने पिछले नौ वर्षों में आठ बार ज्ञापन भेजा। विभिन्न आपदाओं की अवस्था का जायजा लेने के लिए केन्द्रीय टीम ने स्थल निरीक्षण भी किया। लेकिन बिहार को कभी नुकसान के बराबर राशि नहीं मिल सकी। इस बार चार चरणों में आई बाढ़ से सरकारी आंकडों के अनुसार बाढ़ से बिहार के 31 जिलों के 177 प्रखंडों के 1380 पंचायतों के 4862 गांव प्रभावित हुए। जिसकी आबादी 86 लाख 12 हजार 802 है। बाढ़ में 243 मनुष्यों की मौत के साथ ही 5384 मवेषियों की मौत हुई। मकान,झोपडी, कच्चा मकान, फसल आदि के अलावा सडक व स्कूल इत्यादि को नुकसान हुआ। राज्य सरकार ने 2008 में 14800 करोड की मांग की थी लेकिन मिला 1010 करोड रुपए। 2009 में सूखाड से हुइ नुकसान के मद में 14000 करोड की मांग की तुलना में 269 करोड मिले। 2010 में सूखा से हुए नुकसान के मद में 6573 की तुलना में 1459 करोड रुपए मिले। 2013 में सूखाड से नुकसान के एवज में 12564 मांगी गई लेकिन कुछ नहीं मिला। 2015 में तूफान से हुए नुकसान के एवज में 434 करोड मांगी गई थी, उसी वर्ष ओलावृष्टि के एवज में 2040 करोड मांगी गई थी लेकिन कुछ नहीं मिला। इस वर्ष बाढ और सूखाड से बिहार के किसानों का अरबों की चपत लगी है जिसका हिसाब सरकारी आंकलनों में नहीं हो पाता, मुआवजा मिलना तो दूर की बात है। बाढ में साढ़े तीन लाख हेक्टेयर में लगी फसल डूब गई जबकि सूखाड की वजह से करीब दो लाख हेक्टेयर जमीन परती रह गई।

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