भोंडसी आश्रम बना चंद्रशेखर स्मृति वन

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ब्रजेश कुमार झा (एसोसिएट संपादक)

जहां से चंद्रशेखर की स्मृति को मिटाने का प्रयास हुआ था, उस स्थान का नाम ‘चंद्रशेखर स्मृति वन‘ रखा गया है। एक महत्वपूर्ण अवसर पर इसकी घोषणा स्वयं हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने की।

वैसे तो इस स्थान को ‘स्वर्ण जयंती नेचर कैंप‘ के रूप में विकसित किया जा रहा था। लेकिन, राज्य के मुख्यमंत्री ने कुछ अलग मन बनाए हुए थे। 17 जून को हरियाणा के भोंडसी में आयोजित एक समारोह में उन्होंने इसकी घोषणा कर दी।

हरियाणा सरकार के इस निर्णय से पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर को जानने–मानने वाले हर्ष से भरे हैं। इस फैसले पर चंद्रशेखर के निजी सहयोगी रहे एच.एन.शर्मा ने कहा, ”जिनका चंद्रशेखर जी से कोई सीधा संबंध नहीं रहा है, उन लोगों ने चंद्रशेखर को सच्ची श्रद्धांजलि दी।”

⌈ पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर को जानने-मानने वाले इस बात से खुश हैं कि हरियाणा की भाजपा सरकार ने विचारधारात्मक विरोध से ऊपर उठकर उनकी स्मृति को संरक्षित किया है।⌋

देश भर की पैदल यात्रा करने के बाद जब चंद्रशेखर लौटे तो उन्होंने 1983 में भोंडसी व अकलीमपुर गांव पंचायत की दान में मिली जमीन पर ‘भारत यात्रा केंद्र‘ की स्थापना की थी। यह केंद्र अरावली पहाड़ी की तलहटी में आबाद हुआ। चंद्रशेखर ने इस केंद्र को लेकर बड़ा सपना देखा था। कई वर्षों की मेहनत के बाद वे केंद्र को एक स्वरूप देने में सफल हुए थे।

लेकिन होनी को कुछ और मंजूर था। बीसवीं शताब्दी के ढलते वर्षों में यह केंद्र सुर्खियों में रहा। विवाद इतना बढ़ा कि मामला सुप्रीम कोर्ट जा पहुंचा। 2002 में जब कोर्ट का फैसला आया तो चंद्रशेखर ने बना–बनाया केंद्र भोंडसी व अकलीमपुर ग्राम सभा को सौंप दिया। भोंडसी के पूर्व सरपंच राजकपूर बताते हैं कि– ‘चंद्रशेखरजी ने 21 लाख पेड़ लगाकर यह क्षेत्र ग्राम पंचायत को सौंपे थे।‘

2004 में ग्राम सभा ने यह क्षेत्र हरियाणा वन विभाग को दे दिया। तब से पूरा केंद्र वन विभाग की निगरानी में है। रख–रखाव का अभाव केंद्र में चारो तरफ दिखाई देता है। इमारतों का बुरा हाल है। हरियाली भी खत्म हो चुकी है।

वर्षों बाद हरियाणा वन विकास निगम के महाप्रबंधक सुभाष यादव ने इस केंद्र को जीवंत करने का बीड़ा उठाया। दौड़–भाग कर एक योजना तैयार की। राज्य की भाजपा सरकार ने भी उसमें दिलचस्पी दिखाई। यह तय हुआ कि केंद्र को ‘स्वर्ण जयंती नेचर पार्क‘ के रूप में विकसित किया जाएगा।

हालांकि, चंद्रशेखर को जानने–मानने वालों के विचार अलग थे। उन्होंने इच्छा जाहिर की थी कि इस स्थान से चंद्रशेखर का नाम जुड़ा होना चाहिए। अच्छा तो यह होगा कि इसका नाम ‘चंद्रशेखर स्मृति वन‘ ही रखा जाए। आखिरकार वही हुआ है।

एच.एन.शर्मा बताते हैं, ”भूपेंद्र सिंह हुड्डा जब राज्य के मुख्यमंत्री थे तो मैं छह बार उनसे मिलना। मैंने आग्रह किया कि उजड़ते भारत यात्रा केंद्र पर राज्य सरकार ध्यान दे, लेकिन कांग्रेस की सरकार में मेरी बात को गंभीरता से नहीं लिया गया।” ”जिनका चंद्रशेखर जी से कोई सीधा संबंध नहीं रहा है, उन लोगों ने चंद्रशेखर को सच्ची श्रद्धांजलि दी।”- एच.एन.शर्मा।

चंद्रशेखर की स्मृति को बचाए रखने के लिए एच.एन.शर्मा ने दस जून को एक पत्र मुख्यमंत्री के नाम लिखा था। भोंडसी पंचायत की सरपंच दुर्गा देवी व पूर्व सरपंच संजय ने भी गांव की तरफ से निर्विरोध यह मांग की थी। भारत यात्रा केंद्र सामाजिक व राजनीतिक इतिहास की महत्वपूर्ण धरोहर है। चंद्रशेखर यहां लंबे समय तक रहे।

हरियाणा के पर्यटन मंत्री राम बिलास शर्मा ने घोषणा की है कि इस क्षेत्र को पर्यटन केन्द्र के नाते विकसित किया जाएगा। राज्य सभा सदस्य अमर सिंह ने इस पहल पर खुशी जाहिर करते हुए प्रधानमंत्री से यहां चंद्रशेखर की एक प्रतिमा स्थापित करना का आग्रह किया है। (यथावत से साभार)

 

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