किसानों के लिए अश्वगंधा की खेती फायदेमंद, अश्वगंधा के लिए कैसी मिटटी?

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अश्वगंधा एक बहु वर्षीय पौधा है। सभी जड़ी बूटियों में सबसे अधिक प्रसिद्ध अश्वगंधा ही है। अगर लाइफस्टाइल डिजीज की बात करें तो तनाव और चिंता को दूर करने में अश्वगंधा को सबसे फायदेमंद माना जाता है। अश्वगंधा के कई तरह के इस्तेमाल के कारण इसकी मांग हमेशा बनी रहती है। अश्वगंधा की खेती कर किसान धान, गेहूं और मक्का की खेती के मुकाबले 50 फीसदी तक अधिक मुनाफा कमा सकते हैं। यही वजह है कि बिहार और यूपी जैसे राज्यों के किसान भी बड़े पैमाने पर अश्वगंधा की खेती कर रहे हैं। आजकल भारत के किसान परंपरागत फसलों को छोड़कर नकदी और मेडिसिनल प्लांट की खेती कर रहे हैं। इससे उन्हें अपनी आमदनी बढ़ाने में भी काफी मदद मिल रही है। अगर आप भी अश्वगंधा की खेती करके अच्छी खासी कमाई करना चाहते हैं तो हम आपको इस बारे में विस्कीतार से जानकारी दे रहे हैं।
अश्वगंधा की खेती सितंबर-अक्टूबर के महीने में सबसे ज्यादा की जाती है। उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में अश्वगंधा की सबसे ज्यादा खेती होती है।अश्वगंधा के फल, बीज और छाल का प्रयोग कर कई प्रकार की दवाइयां बनाई जाती हैं।अश्वगंधा के बीज का अंकुरण 7 से 8 दिन में हो सकता है। बाजार में अश्वगंधा की डिमांड रोजाना बढ़ रही है। अश्वगंधा के पौधे की कटाई जनवरी से लेकर मार्च तक की जाती है।

बिहार में अश्वगंधा की खेती

बिहार के बेगूसराय और भागलपुर जिले में प्रयोग के तौर पर अश्वगंधा की पहले खेती की गई थी, जो काफी सफल रही है। अब राज्य के कृषि वैज्ञानिक इसे उत्तर बिहार के गोपालगंज, सिवान और सारण में किसानों को लगाने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। केंद्र सरकार की जलवायु अनुकूल खेती के तहत औषधीय पौधा अश्वगंधा की खेती को बिहार में काफी प्रोत्साहित किया जा रहा है।

अश्वगंधा के लिए कैसी मिटटी?

अश्वगंधा की खेती के लिए बलुई, दोमट और लाल मिट्टी काफी उपयुक्त होती है। अगर मिट्टी का पीएच मान 7:00 से 8:00 के बीच रहे तो अश्वगंधा की पैदावार अच्छी हो सकती है। तुलनात्मक रूप से गर्म प्रदेशों में अश्वगंधा की बुआई होती है। अश्वगंधा की खेती के लिए 25 से 30 डिग्री तापमान और 500 से 750 मिलीमीटर वर्षा की जरूरत है। पौधे की वृद्धि के लिए खेत में पर्याप्त नमी रहनी चाहिए। शरद ऋतु में 1 से 2 बारिश में अश्वगंधा की जड़ों का अच्छा विकास होता है।

अश्वगंधा की खेती के लिए बीज की जरूरत

अश्वगंधा की खेती के लिए प्रति हेक्टेयर 10 से 12 किलो बीज की जरूरत होती है। सामान्य तौर पर बीज का अंकुरण 7 से 8 दिन में हो जाता है। अश्वगंधा की दो प्रकार से बुवाई की जाती है। पहली विधि है कतार विधि। इसमें पौधे से पौधे की दूरी 5 सेंटीमीटर और लाइन से लाइन की दूरी 20 सेंटीमीटर रखी जाती है। दूसरी विधि में छिड़काव विधि से अश्वगंधा की अच्छी तरीके से होती है। हल्की जुताई कर खेत में रेट का छिड़काव किया जाता है। 1 मीटर में 40 पौधे लगाए जाते हैं। अश्वगंधा की कटाई जनवरी से लेकर मार्च तक होती है। जड़ को छोटे-छोटे टुकड़े में काटा जाता है और इसे सुखाकर रखा जाता है। पौधों को जड़ से अलग कर रखा जाता है। अश्वगंधा के बीज और फूल को सुखाकर अलग कर लिया जाता है।

औषधीय गुण वाला अश्वगंधा

उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में जब सितंबर और अक्टूबर में बारिश की गतिविधियां कम हो जाती हैं तब किसान इसकी बुवाई करते हैं। अश्वगंधा एक कठोर और सूखा सहिष्णु पौधा है। इसको भारतीय जिनसेंग या जहर आंवला या शीतकालीन चेरी के रूप में भी जाना जाता है और यह भारत के उत्तर-पश्चिमी और मध्य भागों में उगाया जाने वाला एक देशी औषधीय पौधा है। अश्वगंधा जड़ी बूटी एक महत्वपूर्ण प्राचीन पौधा है जिसकी जड़ों का उपयोग भारतीय पारंपरिक चिकित्सा पद्धति जैसे आयुर्वेद और यूनानी में किया गया है।

फसल पकने के बारे में कैसे जानें?

सूखे पत्ते और लाल-नारंगी जामुन परिपक्वता और फसल के समय का संकेत देते हैं। अश्वगंधा की फसल बुवाई के 160-180 दिन बाद कटाई के लिए तैयार हो जाती है। जड़ों के लिए पूरे पौधे को उखाड़कर उन्हें सुखाने की सुविधा के लिए 8 से 10 सेमी के छोटे टुकड़ों में काट दिया जाना चाहिए।

अश्वगंधा से होने वाले स्वास्थ्य लाभ
अश्वगंधा प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ाता है।
अश्वगंधा कोलेस्ट्रॉल कम करने में मदद करता है।
अश्वगंधा रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने में मदद करता है।
अश्वगंधा दिल के लिए अच्छा होता है।
अश्वगंधा कोलेजन को उत्तेजित करता है और घाव भरने में मदद करता है।
अश्वगंधा अवसाद, तनाव और चिंता कम करता है।
अश्वगंधा निष्क्रिय थायराइड को उत्तेजित करता है।
अश्वगंधा मांसपेशियों और ताकत को बढ़ाता है।
अश्वगंधा सूजन और दर्द कम करने में मदद करता है।
अश्वगंधा याददाश्त और संज्ञानात्मक प्रदर्शन को बढ़ाता है।
अश्वगंधा प्रजनन प्रणाली को लाभ पहुंचाता है।
अश्वगंधा ऊर्जा के स्तर और जीवन शक्ति को बढ़ाता है।
अश्वगंधा जोड़ों और आंखों के लिए अच्छा है।
अश्वगंधा कैंसर कोशिकाओं को बढ़ने से रोकता है।

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