मनोज लाल, रांची
झारखंड में दो बार पंचायत चुनाव हो चुके हैं। गांवों की सरकार बनाने और विकास के लिए पंचायतों को कई अधिकार दिये गये हैं। पंचायतों को सशक्त बनाने के लिए भारी-भरकम राशि दी गयी है। पर हालात यह है कि 1567 करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद पांच साल में 952 पंचायतों में आधारभूत संरचना तक नहीं बन पायी है। अपना पंचायत भवन तक बन पाया है। नौ जिलाे में जिला परिषद अध्यक्ष का अपना कार्यालय तक नहीं बन पाया है, जबकि इनके लिए मिले पैसों का अन्य मद में खर्च कर दिया गया।
झारखंड में 13 वें वित्त आयोग से 1567 करोड़ रुपये खर्च हो गये, लेकिन नौ जिलों में जिला परिषद अध्यक्ष के बैठने के लिए अपना कार्यालय तक नहीं बन पाया। 952 मुखिया के बैठने की भी अपनी व्यवस्था नहीं हो पायी, क्योंकि यहां पंचायत भवन नहीं बन सके हैं।
वर्ष 2010-11 से लेकर पिछले पांच वर्षों में केंद्र सरकार ने जो 1567 करोड़ रुपये की राशि दी थी, उसमें पंचायतों के लिए कार्य योजना तय थी। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय समिति ने कार्य योजना को अनुमोदित किया था। हर साल कार्य योजना में इसका उल्लेख किया गया था कि योजना के तहत पंचायत भवनों व जिला परिषद कार्यालय के लिए आधारभूत संरचना तैयार किया जाये। पंचायत के कार्यालयों में कंप्यूटर से लेकर सारे संसाधन उपलब्ध कराने थे। अन्य कार्य तो हुए, पर नौ जिले में जिला परिषद अध्यक्ष का कार्यालय व 23 जिलों में 952 पंचायत भवन अब तक नहीं बन सके हैं. इस मद की बड़ी राशि दूसरी योजनाओं पर खर्च कर दी गयी.
नौ जिलों में जिला परिषद अध्यक्ष कार्यालय भी नहीं
लातेहार,लोहरदगा,खूंटी, सिमडेगा,जामताड़ा,रामगढ़, गढ़वा, गिरिडीह,सरायकेला,खरसावां जिलों में अभी जिला परिषद अध्यक्ष का कार्यालय भी नहीं है।
कितने पंचायत भवन नहीं
जिला संख्या
पलामू 145
लातेहार 36
गढ़वा 71
गुमला 49
खूंटी 20
लोहरदगा 04
हजारीबाग 48
रामगढ़ 59
चतरा 70
कोडरमा 26
रांची 39
बोकारो 20
जिला संख्या
धनबाद 22
गिरिडीह 119
सरायकेला 27
प सिंहभूम 81
पू सिंहभूम 34
देवघर 9
दुमका 28
पाकुड़ 11
जामताड़ा 01
साहेबगंज 10
गोड्डा 23
कुल 952
साभार: प्रभात खबर
