
नयी दिल्ली: वैसे तो केंद्र सरकार व्यापक स्तर पर राज्यों के साथ मिलकर फाईलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम चला रही है लेकिन इस बीच केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे वर्ष 2027 तक लसीका फाइलेरिया (lymphatic filariasis) को समाप्त करने की रूपरेखा तैयार करें। बड़ी बात यह है कि यह लक्ष्य इस बीमारी को समाप्त करने के वैश्विक लक्ष्य से तीन वर्ष कम है। उन्होंने कहा है कि नए भारत में लसीका फाइलेरिया इतिहास बन जाना चाहिए। केंद्रीय मंत्री ने इसके लिए सभी लोगों को मिलकर काम करने के संकल्प करने के प्रति प्रतिबद्ध होने को कहा है।
रोडमैप बना रही है केंद्र सरकार
केंद्र सरकार लसीका फाइलेरिया (lymphatic filariasis) को खत्म करने के लिए एक ताकि वैश्विक लक्ष्य 2030 से पहले ही भारत को इस बीमारी से निजात मिल सके, जिसके लिए केंद्र सरकार भारत मिशन मोड, मल्टी पार्टनर, मल्टी सेक्टर, लक्षित ड्राइव के जरिये लिम्फैटिक फाइलेरिया को खत्म करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।
Inaugurated National Symposium on India's Roadmap to Eliminate Lymphatic Filariasis.
Called for eliminating the disease through Jan-Bhagidari.
Also, urged to prepare a roadmap towards elimination of LF by 2027, three years ahead of global target for eliminating this disease. pic.twitter.com/l6Ou66151d
— Dr Mansukh Mandaviya (@mansukhmandviya) January 13, 2023
पांच आयामी रोडमैप
केंद्र सरकार अन्य बीमारियों के उन्मूलन में देश के व्यापक अनुभव से सीखते हुए, लसीका फाइलेरिया (lymphatic filariasis) के उन्मूलन के लिए नए सिरे से पांच-स्तरीय रणनीति पर काम कर रही है:
Multi-drug administration (MDA) अभियान राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस (10 फरवरी और 10 अगस्त) के साथ साल में दो बार
प्रारंभिक निदान और उपचार; रुग्णता प्रबंधन और विकलांगता (MMDP) सेवाओं को मजबूत करने के लिए मेडिकल कॉलेजों की नियुक्ति
बहु क्षेत्रीय समन्वित प्रयासों के साथ Integrated Vector Control
संबद्ध विभागों और मंत्रालयों के साथ अंतर क्षेत्रीय अभिसरण के लिए
LF के लिए मौजूदा डिजिटल प्लेटफॉर्म का लाभ उठाना और alternate diagnostics की खोज करना
लसीका फाइलेरिया (lymphatic filariasis) संक्रमित मच्छरों के काटने से फैलता है। यह मच्छर फ्लूलेक्स एवं मैनसोनाइडिस प्रजाति के होते हैं। लसीका फाइलेरिया को आमतौर पर हाथी पांव के नाम से जाना जाता है।
फाइलेरिया (filariasis) से बचाव के लिए जरूरी है… साल में एक बार दवा के सेवन
लसीका फाइलेरिया से मुक्ति के लिए जरूरी है जनभागीदारी
लसीका फाइलेरिया (lymphatic filariasis) से मुक्त होने के लिए जनभागीदारी जरुरी है। हम जनभागीदारी के जरिये ही पोलियो मुक्त हुए है। आज हम सब के लिए जरुरी है कि विभिन्न मंत्रालय, केंद्र और राज्यों के विभाग, गैर सरकारी संगठनों का सहयोग लेकर और एक रणनीति बनाकर लसीका फाइलेरिया उन्मूलन की दिशा में आगे बढें। हमे आज अपनी प्राथमिकताओं को पहचान कर और अपनी योजनाओं को कुशलतापूर्वक लागू कर एक “इंडिया मॉडल” बनाने पर ज़ोर देना चाहिए।
लसीका फाइलेरिया (lymphatic filariasis) के मामले में भारत की स्थिती
एक आकलन के अनुसार भारत के 20 राज्यों के 250 से ज्यादा जिलों में महामारी की तरह फैला हुआ है इसका सीधा अर्थ यह हुआ कि लगभग 65 करोड़ आबादी इसकी चपेट में है। वहीं WHO के अनुसार, दुनियाभर में 52 देशों में 856 मिलियन लोग इस रोग से पीड़ित हैं।
केंद्र सरकार कर रही है गंभीर प्रयास
लसीका फाइलेरिया (lymphatic filariasis)जैसे गंभीर बीमारी से मुक्ति दिलाने के लिए केंद्र सरकार तत्पर है। रोग प्रबंधन और प्रशिक्षण के जरिए लोगों को जागरूक बनाया जा रहा है। लसीका फाइलेरिया के कारण व बचाव के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए ही प्रत्येक वर्ष 11 नवंबर को राष्ट्रीय दिवस मनाया जाता है। इसके अलावा केंद्र सरकार अन्य प्रयास भी कर रही है:
सरकार ने वर्ष 2018 में ‘Accelerated Plan for Elimination of Lymphatic Filariasis- APELF’ नामक पहल की थी।
केंद्र सरकार दिसंबर 2019 से ‘Triple Drug Therapy’ को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने के लिये प्रयासरत है।
इन बीमारियों से मुक्ति हुआ भारत
भारत ने कुछ महामारियों के खिलाफ जंग लड़ने में कामयाबी हासिल की है जिसमें पोलियो, हैज़ा, प्लेग, चेचक, खसरा शामिल है। भारत ने महामारियों के खिलाफ जंग में जनस्वास्थ्य के स्तर पर बड़े और सख़्त कदम उठाए और सोसाइटी के स्तर पर इसे रोकने, नियंत्रित करने की पुरजोर कोशिश की। केंद्र सरकार के व्यापक टीकाकरण कार्यक्रम ने इन बीमारियों से बचाव किया और यही कारण है कि आज हमारे देश को पोलियो, हैज़ा, प्लेग, चेचक, खसरा जैसी बीमारियों से मुक्ति मिली।

