अन्ना ने कहा … आरक्षण खत्म करें, देश के लिए खतरा

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संतोष कुमार सिंह
एक तरफ संघ प्रमुख मोहन भागवत मोहन भागवत के आरक्षण की समीक्षा किये जाने को लेकर दिया गये बयान से उपजा सवाल और बवाल अभी थमा भी नहीं है कि सामाजिक कार्यकर्ता और देश में जेपी के बाद सबसे बड़े आंदोलन के सूत्रधार रहे अन्ना हजारे ने आरक्षण को लेकर बयान दिया है। अन्ना ने कहा है कि ‘राजनीतिक दलों के कारण आरक्षण देश के लिए खतरा है और इसे खत्म करने की वकालत की है. अन्ना ने कहा है कि जब आरक्षण शुरू किया गया था तब पांच दस साल के लिए गरीबों व अमीरों का फासला कम करने के लिए ऐसा किया गया था. आस्ते-आस्ते राजनीतिक दल उससे जुड़ गये और फिर यह देश के लिए ही खतरा बन गया.

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हालांकि अन्ना ने इस बाबत कुछ नहीं कहा है कि क्या वे जनलोकपाल और किसानों के मसलों की तरह ही आरक्षण हटाने के लिए आंदोलन करेंगे?

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बरसे लालू कहा….अन्ना हजारे व आरएसएस के गुरु गोलवलकर, मोहन भागवत, नरेंद्र मोदी व अमित शाह सभी एंटी पुवर, एंटी बैकवर्ड व एंटी दलित हैं. ये लोग बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर को अपमानित कर रहे हैं, जिन्होंने दलितों व पिछड़ों को संविधान में स्थान दिया था.
इस तरह देखा जाये जा तो आरक्षण का जिन्न बोतल से से एक बार फिर बाहर आ गया है। समीक्षा की मांग, या फिर इसे समाप्त करने की बात कहने मात्र से तीखी प्रतिक्रिया होती है, लेकिन इस सवाल पर कोई बहस होती नहीं दिख रही कि जिन तबकों के लिए आरक्षण की व्यवस्था संविधान में की गयी थी, क्या उन्हें इसका लाभ मिल रहा है, या फिर चंद लोग या कुछेक जातियां ही इसका फायदा उठा रही है।

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