सरकारी पाठशाला के नौ कमरों में नौ स्कूल, एक कमरे में पांच कक्षाएं

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रुपेश कुमार

उत्तर प्रदेश के बिजनौर जनपद में एक भवन मे नौ पाठशालाएं चलती हैं। यह किसी दूरदराज के गांव का नहीं,  बल्कि नगीना नगर क्षेत्र की सरकारी पाठशाला लोहारी सराय का मामला है। लोहारी सराय पाठशाला भवन के हर कमरे में एक स्कूल संचालित हो रहा है। पाठशाला में नौ कमरे बने हैं जिनमें नौ पाठशालाएं चलती हैं। इन पाठशालाओं में 331 बच्चों को शिक्षा दी जाती है। पढ़ाने के लिए एक अध्यापक और आठ शिक्षा मित्र तैनात हैं।

लोहारी सराय पाठशाला की हालत ऐसी है कि एक कमरे में पांच-पांच कक्षाए संचालित होती हैं। जबकि नियम के अनुसार एक प्राथमिक विद्यालय में कम से कम तीन कक्ष और अधिकतम पांच कक्ष होना चाहिए। इन विद्यालयों में कुल मिलाकर एक अध्यापक और आठ शिक्षामित्र तैनात हैं। हर अध्यापक को एक साथ पांच कक्षाओं के छात्रों को पढ़ाना होता है। इन नौ विद्यालयों में मुहल्ला लोहारी सराय, लाल सराय, अम्बेदकर नगर आदि पांच मुहल्लों के बच्चे पढ़ने के लिए आते हैं। उनके 331 छात्रों के लिए विद्यालय परिसर में चार टायलेट हैं।

बिजनौर के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी महेशचंद्र ने बताया कि असल में किराय के जर्जर भवनों में चल रहे विद्यालयों को लोहारी सराय विद्यालय भवन में शिफ्ट किया गया था। इस बारे में सरकार को बताया जा चौका है। काफी समय से इस नगर की शिक्षा विभाग के लिए सरकार की ओर से कोई बजट उपलब्ध नहीं कराया गया है। लेकिन बच्चों को जर्जर भवन में छोड़कर जोखिम नहीं उठाया जा सकता।

नगर शिक्षा अधिकारी विश्वजीत राठी के अनुसार नगर के दूसरे क्षेत्रों में भी ऐसे विद्यालय चल रहे है। धामपुर बीआरसी में प्रथमिक विद्यालय तिलक में एक ही परिसर में चार विद्यालय चल रहे हैं। नजीबाबाद नगर क्षेत्र में वाहिदाबाद प्रथमिक विद्यालय में एक परिसर में पांच विद्यालय चल रहे हैं। वहां एक अऩ्य प्रथमिक विद्यालय भवन में पांच विद्यालय चल रहे हैं। इसके अलावा प्रथमिक विद्यालय बारादरी, अकाबरन, सय्यदबाड़ा, पटेरी, टांडा, पहाड़ी दरवाजा, विश्नोई सराय में भी एक ही परिसर में कई विद्यालय चल रहे हैं।

लोहारी सराय के जिस भवन में इतने सारे विद्यालय चल रहे हैं, उसकी हालत भी कुछ ज्यादा ठीक नहीं है। यह भवन भी काफी पुराना है और बारिश होने पर उसकी छल टपकने लगती है। ऐसै भी विद्यालय में बेंच-डेस्क नहीं हैं, बच्चे जमीन पर बैठकर शिक्षा ग्रहण करते हैं। बरसात के दिनों में नारकीय स्थिति हो जाती है।

(हिन्दुस्तान से साभार)

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