सरकारी नहीं तो निजी सुरक्षा गार्ड बन लाखों पा रहे रोजगार

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                            संतोष कुमार सिंह

नयी दिल्ली: प्रेमकांत जैसे ही मैट्रिक पास किये बस एक ही तमन्ना थी देश सेवा करना है। सेना में जाना है। पुलिस की नौकरी करनी है। लंबाई 6 फीट, शरीर से स्वस्थ। दौड़ में अव्वल। साथी संगी मैदान में दौड़ लगाते देखते तो कहते जल्द ही चुना जाएगा। मां को भी खुशी थी कि बेटा बहाल हो जाए तो घर की तंगी कम हो। कोई भी मौसम हो, बिना थके हारे, लगे मैदान में दौड़ लगाने। कई जगह चुने भी गए। कहीं मेडिकल में छट गए तो कहीं किसी और कारन से। दलालों ने झांसा भी दिया कि पैसा लगाओ नौकरी पाओ। गांव के कई लड़के पैसा देकर बहाल हो गए। लेकिन वे पैसा कहां से लाते] अगर इंतजाम करते भी तो जो थोरा खेत था उसे बेचकर। उसमे भी पैसा डूबने का डर। मन मसोस कर रह गये। साल दर साल बीतता गया, साथ के संगी बहाल होते गए। प्रेमकांत के सामने बेरोजगारी मुंह बाये खड़ी थी। करते तो क्या करते? लेकिन प्रेमकांत ने हिम्मत नहीं हारी। सेवा का जज्बा तो था ही,घर की जिम्मेवारी भी थी। मन मसोस कर रोजगार के वास्ते महानगरों का रूख किया, और शारीरिक सौष्टव के बल पर निजी सुरक्षा एजेंसी में नौकरी पा गए। यह किसी एक प्रेमकांत की कहानी नहीं गांव के उन लाखों नौजवानों की स्थिति है जो पुलिस बल में जाने का सपना पूरा न होने पर निजी सुरक्षा एजेंसी में रोजगार पा रहे हैं। एक आंकडे के मुताबिक इन दिनों सेवा के इस क्षेत्र में 60 लाख से अधिक लोगों को रोजगार मिला हुआ है। इसमें समाज के ज्यादातर गरीब और वंचित क्षेत्र के लोग काम करते हैं। इस क्षेत्र हर साल 20 फीसदी की वृद्धि हो रही है और अगले कुछ वर्षों में यह एक करोड़ होने की संभावना की है।

atm-guardहर जगह निजी सुरक्षा गार्ड आज कोई भी ऐसा क्षेत्र नहीं जहाँ निजी सुरक्षा गार्ड कम न कार रहे हों. यहाँ तक की सरकारी भवनों, राष्ट्रीय स्मारकों, कॉर्पोरेट कार्यालयों और मोबाइल टावरों की देखभाल कर रहे हैं। ज्यादातर बैंक, एटीम केंद्र पर निजी सुरक्षा गार्ड लगे हुए हैं। बावजूद इसके उनके सुरक्षा का कोई खास प्रबंध नहीं । खुद केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह भी इस बात से अवगत हैं। इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट आफ सिक्यूरिटी एंड सेफ्टी मैनेजमेंट द्वारा आयोजित कार्यक्रम में वे कहते हैं “ आतंकी खतरों के मद्देनजर गृह मंत्रालय देश के सभी भागों में कंपनी के कार्यालयों की देखभाल के लिए निजी सुरक्षा गार्डों को आधुनिक प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए उत्सुक है। वर्तमान में लगभग 50 लाख निजी सुरक्षा गार्ड देश भर में कंपनियों के कार्यालयों में सुरक्षा प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार निजी सुरक्षा एजेंसियों के साथ मिलकर काम के लिए गंभीर है। उन्होंने राष्ट्र विरोधी तत्वों द्वारा शुरू साइबर युद्ध के संबंध में कहा कि आने वाले दिनों में साइवर युद्ध के और तेज होने की संभावना है। साइवर युद्ध के पीछे जो लोग हैं उन सभी के नापाक इरादों को नाकाम करने के लिए यह महत्वपूर्ण है।

मिलता है रोजगार, लेकिन वेतन असमान

नौजवानों को निजी निजी सुरक्षा एजेंसियों में कम भले ही मिलता हो लेकिन उनका वेतन नियत नहीं है. वे एजेंसियों के मालिकों के भेदभाव का शिकार होते हैं। कोई 8 हजार पर कम कार रहा है तो कोई १० हजार पर। ज्यादातर कम्पनियां १२ घंटे कम लेती हैं। मालिकों से वेतन कुछ निधारित किया जाता है जबकि इनके हाथ कम आता है।

51Security-Guard-Urgently-केंद्रीय श्रम और रोजगार (स्वतंत्र प्रभार) मंत्री बंडारू दत्तात्रेय ने कहा कि “इस क्षेत्र में काम करने वाले को उचित मजदूरी दी जानी चाहिए। उनके लिए न्यूनतम मजदूरी की बात करना बहुत छोटी है। इसलिए उन्हें न्यूनतम नहीं बल्कि उचित मजदूरी दी जानी चाहिए। हमारी सरकार उचित मजदूरी दिए जाने के पक्ष में है। हम श्रम कानूनों के तहत ओवरटाइम काम कर रहे हैं। इसे नियोक्ताओं और कर्मचारियों के लिए और अनुकूल बनाने के बारे में सरकार विचार कर रही है।“

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