संतोष कुमार सिंह
कोलंबो : क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदूलकर अपने बल्ले से क्रिकेट प्रेमियों का मनोरंजन तो करते ही हैं लेकिन समय—समय पर सामाजिक कार्यों में भी योगदान देते हैं। सचिन तेंदुलकर ने आज दक्षिण एशिया के बच्चों में सफाई को बढावा देने के लक्ष्य के साथ एक नये कार्यक्रम ‘वाश इन स्कूल’ को लांच किया. वे संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) के सदभावना दूत तेंदुलकर ‘वाश इन स्कूल’ पहल को बढावा दे रहे हैं जिसका लक्ष्य खराब सफाई व्यवस्था के कारण होने वाली मौतों में कमी लाना है. वे दक्षिण एशिया में लाखों लोग शौचालय ने महरुम हैं. संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) के सदभावना दूत के रूप में तेंदुलकर ‘वाश इन स्कूल’ पहल को बढावा दे रहे हैं जिसका लक्ष्य खराब सफाई व्यवस्था के कारण होने वाली मौतों में कमी लाना है. तेंदुलकर ने कहा कि खाना खाने से पहले किस तरह साबुन और पानी के इस्तेमाल से हाथ धोए जाएं और बीमारी के खतरे से बचा जाए. उन्होंने कहा कि साबुन से हाथ धोने की इस सामान्य आदत के जरिये बच्चे सुरक्षित रह सकते हैं, बल्कि उन्हें डायरिया जैसी बीमारियों से भी बचाया जा सकता है।
संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के मुताबिक विश्व में 5 वर्ष के कम उम्र के लगभग 1800 बच्चे स्वच्छता के अभाव के रोजाना कारण मर जाते हैं। यूनिसेफ के आंकड़ों के मुताबिक पिछले दो दशक में दक्षिण एशिया में इस दिशा में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। 1995 में मात्र 20 फीसदी लोग शौचालय का इस्तेमाल करते थे, जबकि इस वर्ष तक यह आंकड़ा बढ़कर 45 फीसदी हो गया है। अभी भी दक्षिण एशिया में बड़ी संख्या में अर्थात 64 फीसदी लोग अभी भी खुले में शौच करते है। 610 मिलियन लोगों के पास अभी भी शौचालय नहीं है। अगर श्रीलंका की बात करें तो 20 मिलियन घरों में से 14 फीसदी घरों में अभी भी शौचालय नहीं है।
यूनिसेफ श्रीलंका के ट्विटर हैंडल ने तेंदुलकर ने हवाले से लिखा, ‘‘मेरी मां हाथ धोने से पहले मुझे कभी खाना खाने की स्वीकृति नहीं देती थी. हमें सुनिश्चित करना होगा कि सभी बच्चे ये आदत सीखें.” इस मौके पर श्रीलंका के महान क्रिकेट खिलाड़ी मुथैया मुरलीधरन भी मौजूद थे और उन्होंने स्कूली बच्चों के साथ क्रिकेट भी खेला.

