स्वास्थ्य सुवाधाओं को लेकर सरकार की ओर से किये जाने वाले बड़े-बड़े दावे झुमरा पहाड़ जैसे इलाकों तक पहुंचते—पहुंचते दम तोड़ देते हैं। आजादी के इतने वर्षों बाद भी देश के यह इलाके स्वास्थ्य सुविधाओं और सड़कों से वंचित है। ऐसे में लोगों के बीमार होने पर कई बार तो नौबत जान जाने तक की आ जाती है। ऐसी ही एक घटना में झुमरा पहाड़ की पचमो पंचायत के अंतर्गत आने वाले सिमराबेड़ा गांव में घटी।
आदिवासी महिला चमेली कुमारी (30) को तड़के तीन बजे जब अचानक प्रसव पीड़ा होने लगी तो उसके परिजन चारपाई पर रख कर खेतों-पगडंडियों से होते हुए किसी तरह सात किलोमीटर दूर झुमरा पहाड़ स्थित सड़क तक ले आये। इसके बाद यहां से किराये के वाहन से नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र, जो 60 किलोमीटर दूर गोमिया में स्थित है, लाया गया। यह गांव बरसों से पक्की सड़क की रहा देख रहा है और किसी व्यक्ति के बीमार होने की सूरत में ऐसा नजारा यहां आम है।
फिलहाल महिला खतरे से बाहर है। स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी एफ होरो की देखरेख में महिला का इलाज चल रहा है।
जिला प्रशासन इस क्षेत्र में झुमरा एक्शन प्लान के तरह विकास करने की बात कहता है। लेकिन, पचमो पंचायत में न ममता वाहन की सुविधा है और न एंबुलेंस की।
झुमरा पहाड़ में स्वास्थ्य विभाग की ओर से लगभग दो साल पूर्व ही अस्पताल बनाया गया है, लेकिन अब तक इसके चालू नहीं होने से ग्रामीण स्वास्थ्य सुविधा से वंचित हैं। मुखिया रेणुका देवी ने कहा कि झुमरा से ममता वाहन नहीं मिल पाता है। वहीं सांसद की ओर से दी गयी एंबुलेंस भी खराब पड़ी है। वहीं विभाग के कार्यपालक अभियंता बीडी राम ने बताया कि झुमरा से सिमराबेड़ा तक पथ निर्माण के लिए ग्रामीण विकास की ओर से निविदा हो चुकी है। लेकिन, वन विभाग का एनओसी नहीं मिलने के कारण पथ का निर्माण नहीं हो पा रहा है।
एक एएनएम के भरोसे है पचमो पंचायत के आठ गांव
पचमो पंचायत में एक एएनएम जयश्री एक्का के भरोसे आठ गांवों की स्वास्थ्य सेवा है। उक्त एएनएम को पचमो ग्राम के निकट रहावन, झुमरा पहाड़, जमनीजरा, बलथरवा, सिमराबेड़ा, सुवर कटवा, लेडी आम आदि टोला व गांव में दवा आदि का वितरण करना है।
