छत्तीसगढ़ में अलसी की खेती के लिए आगे आएं किसान : कृषि उत्पादन आयुक्त

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कम लागत एवं ज्यादा मुनाफा वाली फसल है अलसी

रायपुर । छत्तीसगढ़ के कृषि उत्पादन आयुक्त डॉ. कमलप्रीत सिंह ने कहा है कि अलसी फसल की उपयोगिता, महत्व, कम लागत एवं ज्यादा मुनाफे को देखते हुए छत्तीसगढ़ सरकार राज्य में इसके उत्पादन को बढ़ावा दे रही है तथा किसानों को अलसी की खेती के लिए प्रेरित कर रही है। उन्होंने कहा कि अलसी एक बहुउपयोगी फसल है, जिससे तेल, कपड़ा तथा अन्य कई उत्पाद निर्मित किये जा सकते हैं। कृषि उत्पादन आयुक्त ने कहा कि यह फसल मौसम की प्रतिकूलता को सहन करने में सक्षम है तथा कम पानी और अल्प संसाधनों में भी अच्छी उपज देती है। डॉ. सिंह ने किसानों से अलसी की खेती के लिए आगे आने का आव्हान किया। उन्होंने कृषि वैज्ञानिकों से अलसी की अधिक उपज देने वाली डुअल परपस नवीन किस्में विकसित करने का अनुरोध किया ।

कार्यक्रम में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के संचालक अनुसंधान डॉ. विवेक त्रिपाठी ने कहा कि कृषि महाविद्यालय रायपुर में अखिल भारतीय समन्वित अलसी अनुसंधान परियोजना वर्ष 1967 से संचालित है। राज्य में लगभग 46 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में अलसी की खेती की जा रही है। भारत में अलसी का कुल उत्पादन 11 लाख मेट्रिक टन होता है जिसमें से 1 लाख 30 हजार मेट्रिक टन उत्पादन छत्तीसगढ़ में होता है। यहां अलसी की औसत उपज तीन से चार क्विंटल प्रति हेक्टेयर है जिसे आसानी से बढ़ाकर 8 से 10 क्विंटल प्रति हेक्टेयर किया जा सकता है। अलसी का प्रचलित बाजार मूल्य 6 हजार रूपये प्रति क्विंटल है। उन्होंने बताया कि परियोजना के तहत यहां अलसी की 16 नवीन किस्में विकसित की गई है जो अधिक उत्पादन देने में सक्षम हैं। विश्वविद्यालय में संचालित प्रयोगों में 20 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उपज प्राप्त की गई है। शुभारंभ समारोह में दौरान अलसी अनुसंधान में पर उत्कृष्ट योगदान देने हेतु कृषि वैज्ञानिकों डॉ. के.पी. वर्मा, डॉ. एस.एस. राव तथा पी.के. चन्द्राकर को सम्मानित किया गया। प्रगतिशील अलसी उत्पादक किसानों को भी सम्मानित किया गया। अनुसुचित जाति, जन जाति वर्ग के कृषकों को खाद, बीज एवं स्प्रेयर का वितरण किया गया है।

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