अमितेश सिंह
सैफई में सितारे जमीन पर उतर आये हैं। चहुओर उजियारा है,लेकिन ये सैफई है गाजीपुर नहीं। गाजीपुर तो कही और है जहां अंधेरे में डूबा अस्पताल और मोमबत्ती की रौशनी में सेहत सुधर जाने की उम्मीद में लोग टूटते तारे के उजाले और रात के अंधियारे में जिंदगी की बांट जोह रहे हैं। बिजली के इंतजार में ठप पड़ी मेडिकल मशीनें और चेकअप और परीक्षण के लिए बिजली का लंबा इंतजार। मरीजों के इलाज की सरकारी व्यवस्था का ये आलम गाजीपुर जिला अस्पताल में पिछले तीन महीनों से बना हुआ है। ये नजारा तब है जब अस्पताल को २४ घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति के आदेश है। अस्पताल में बिजली की बदहाल हालत से मरीज और डाक्टर हलकान है,जबकि बिजली विभाग के अफसर महज बहानों पर जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
जनता के स्वास्थ्य और सेहत को लेकर सरकार हर साल करोड़ों अरबों रुपये फूंक रही है।लेकिन स्वास्थ्य सुविधाओं के नाम पर सरकारी अस्पताल रौशनी के भी मोहताज है। ये नजारा है गाजीपुर जिला अस्पताल का। अस्पताल मे २४ घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति का आदेश है,लेकिन तीन महीनो से अस्पताल में मोमबत्ती के सहारे इलाज चल रहा है। बिजली की बदहाली से तमाम मेडिकल मशीने शो पीस बनी हुई है। सुचारु बिजली आपूर्ति के लिए तीन महीनों से सरकारी खतो किताबत भी हो रही है,लेकिन मामला ज्यों का त्यों बना हुआ है। ऐसे में अस्पताल में भर्त्ती मरीजों के साथ साथ डाक्टर और हास्पिटल स्टाफ भी बेबस नजर आ रहे हैं।
डा.एके मिश्रा,सीएमएस कहते है कि, “ तीन महीनों से बिजली की समस्या से जूझ रहे अस्पताल में डाक्टर और मरीज सब हैरान परेशान है। चिकित्सीय कामकाज बुरी तरह प्रभावित हो रहा है,लेकिन बिजली महकमा तीन महीनों में अब तक महज लाइन फाल्ट ही खोज पाया है। तीन महीने पहले शुरु हुई समस्या को दुरुस्त करने के लिए अब बिजली विभाग के स्टार पर सिर्फ आश्वासन ही मिले हैं की जल्द ठीक हो जायेगा, लेकिन वे कोई कदम नहीं उठा रहे हैं।”
बिजली विभाग के अधिकारी एसएल मौर्या, कहते हैं की इस विषय में शिकायत मिली है जिसे जल्द दूर कर लिया जायेगा, लेकिन वे इस सवाल का कोई जवाब नहीं देते की अब तक क्यों नहीं ठीक किया गया?
गाजीपुर जिला अस्पताल में तीन महीनों से बनी इस समस्या से मरीजों के साथ साथ तीमारदारों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है।बिजली के अभाव में जेनरेटर तो चलता है,लेकिन कभी कभार,वजह अस्पताल के पास बजट की कमी।ऐसे में डाक्टर और स्टाफ भी महज सरकारी ड्यूटी निभा कर फुर्सत हैं।फिलहाल अस्पताल की ये हालत बिजली विभाग के निकम्मे रवैये को ही साबित कर रही है।

