किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) योजना का विस्तार करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने इसके नियमों को आसान करने की बात कही है। सरकार की माने तो आज केवल 50 प्रतिशत किसानों के पास ही किसान क्रेडिट कार्ड की सुविधा है। एक अनुमान के मुताबिक देश में तकरीबन 14 करोड़ किसान परिवारों है और केवल सात करोड़ के पास ही यह कार्ड है। इसकी एक बड़ी वजह यह भी है कि कार्ड बनवाने के लिए किसानों को बैंकिंग की जटिल प्रक्रिया से होकर गुजरना पड़ता है। किसानी की माने तो यह बैंकिंग सिस्टम उन्हें सपोर्ट नहीं करता। लेकिन, सरकार अब इस दिशा में कदम उठाने जा रही है। ऐसा माना जा रहा है कि नए नियमों के बाद अधिक किसान इस योजना का लाभ उठा सकेंगे और खेती-किसानी में उनको मदद मिलेगी। सरकार का कहा है कि केसीसी के लिए अब सिर्फ तीन डॉक्यूमेंट ही लिए जाएंगे।
इसके लिए सरकार ने जो तीन मांपदंड रखे है उसमें पहला यह है कि जो व्यक्ति कार्ड के लिए आवेदन दे रहा है वह किसान है या नहीं। इसके लिए बैंक उसके खेती के कागजात देखकर उसकी पुष्टी करेगा। दूसरा किसान को अपना निवास प्रमाण पत्र देना होगा। और वहीं तीसरा और अंतिम शर्त यह है कि आवेदक बैंक को एक शपथ पत्र देगा, जिसमें वह यह घोषणा करेगा कि उसका किसी और बैंक में लोन बकाया नहीं है। सरकार ने बैंको से कहा है कि केसीसी आवेदन के लिए कोई फीस न ली जाए।
इस बाबत केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों और बैंकों को कहा गया है कि वो पंचायतों के सहयोग से गांवों में कैंप लगाकर किसान क्रेडिट कार्ड बनवाएं। मोदी सरकार ने केसीसी को सिर्फ खेती तक सीमित नहीं रखा है। अब पशुपालन और मछलीपालन के लिए भी केसीसी बनवाया जा सकता है। इन दोनों श्रेणियों में अधिकतम दो लाख रुपये और किसानी के लिए तीन लाख रुपये की लोन राशि का प्रावधान किया गया है।
