आलोक रंजन
राजनीति की पाठशाला छात्रसंघ से सियासत का ककहरा सिखने वाले छात्र नेताओ ने अब गाव के पंचायत चुनाव में राजनितिक भविष्य तलाशना शुरू कर दिया है। यूनिवर्सिटी और कालेजों में छात्रसंघ पदाधिकारी रह चुके कई दिग्गज नेताओ ने इस बार जिला पंचायत सदस्य के चुनाव में ताल ठोकी है।इनमे कुछ पोलिटिकल पार्टीज के भरोसे आगे बढ़ने का सपना पाले हुए है तो कुछ अपने संघर्षो के बल बूते तैयार की गयी जमीन पर एतबार है। स बात यह है कि विद्यापीठ यूनिवर्सिटी के अध दर्जन से अधिक छात्र नेताओ ने विद्यापीठ ब्लाक से जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ने के लिए नामांकन किया है।
छात्र राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाने वाले अमित पटेल रिंकू काशी विद्यापीठ में2012 में छात्रसंघ के महामंत्री का चुनाव लड़े थे। महज 131 वोट से चुनाव हार गये थे लेकिन छात्र राजनीति के दम पर अपने छोटे भाई अनित पटेल को 2015 में विद्यापीठ छात्रसंघ महामंत्री बनाने में कामयाब रहे ।छात्रसंघ चुनाव में डंका बजाने के बाद अब वह गाँव कि राजनीति में भी किस्मत आजमा रहे है।पहली बार विद्यापीठ ब्लाक के सेक्टर नंबर 5 से जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ रहे अमित पटेल को जातीय समीकरण के साथ ही पांच साल से क्षेत्र में लोगो के बिच रहने का फायदा मिलने क8 उम्मीद है।उनका दावा है कि छात्र राजनीति के समय बनी पहचान चुनाव फतह करने में मद्दगार होगी।
कुछ तो ऐसे भी है जो किसी न किसी पार्टी की छात्र इकाई के के क्षेत्रीय पदाधिकारी भी है जो इस बार के पंचायत चुनाव में अपनी किस्मत आजमा रही है इसी कड़ी में समाजवादी छात्रसभा के जिलाध्यक्ष का भी नाम आता है जो इस बार मैदान में है।काशी विद्यापीठ के छात्रसंघ अध्यक्ष का लड़ चुके पियूष कुमार यादव भी जो विद्यापीठ ब्लाक के सेक्टर नंबर 6 से मैदान में है।छात्र राजनीती से निकल कर गंवई राजनीती की डगर पकड़ने वाले पियूष वर्तमान में सक्षस के जिलाध्यक्ष भी है।
इसी तरह छात्र नेता के रूप मिली पहचान के बूते सरिता को जीत की उम्मीद है।सभी का एक ही मुद्दा है गाँव में बिगडती शिक्षा स्तर को सुधारना,बिजली ,स्वच्छ पानी,हर घर शौचाळय का निर्माण करना प्रमुख मुद्दा है।
