आधी- आबादी के वोट का चोट….मजबूत होता लोकतंत्र

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अमरनाथ की रिपोर्ट

 

बिहार विधानसभा चुनाव में इस बार महिलाएं निर्णायक बनकर उभरी हैं. पहले दो चरणों में महिलाओं ने मानो मतदान आंदोलन चलाया है. मतदान में महिलाओ की रिकार्ड हिस्सेदारी ने बतला दिया है कि वे बदलाव चाहती हैं. बदलाव ऐसा जिसमें भ्रष्टाचार , जातपात, बाहुबल व अपराध न हो. इस बात को स्वयं मुख्य चुनाव आयुक्त नसीम जैदी स्वीकार करते हैं कि इसबार महिलाएं निर्णायक भूमिका में हैं. पहले दोनो चरणों में महिलाओ की हिस्सेदारी पुरुषों के मुकाबले पांच प्रतिशत अधिक रही. जबकि महिला प्रत्याशियों की संख्या कोई खास बढ़ोतरी नहीं हुई है. पहले चरण में केवल नौ प्रतिशत और दूसरे चरण में सात प्रतिशत थी. जबकि पहले चरण में ५९ प्रतिशत और दूसरे चरण में ५७ प्रतिशत महिलाओ ने मतदान किया है. मतदान में पुरुषो की हिस्सेदारी ५४ प्रतिशत और ५२ प्रतिशत रही.

mahila voter

महिला मतदाताओ की इस बढ़ी हिस्सेदारी की वजह से चुनाव परिणामो का अनुमान लगाने में चुनावी पंडितो   का सारा गणित गड़बड़ा गया है. पिछले विधानसभा चुनाव २०१० में ३०७ महिलाएं प्रत्याशी थी. ३४ जीती . उम्मीदवारी और जीत का अनुपात देखें तो महिलाओं ने पिछले चुनाव में पुरुषों को पीछे छोड दिया था. आंकड़ो को देखे तो प्रत्येक नौ महिला उम्मीदवारो में से एक प्रत्याशी जीती, जबकि पुरुषों में पंद्रह उम्मीदवारों में से एक उम्मीदवार जीता था. इसके बाद भी इन चुनावो में राजनीतिक दलों ने महिलाओ को उम्मीदवार बनाने में उदारता नही दिखलाई है. जबकि पंचायती राज संस्थानों में महिलाओ के लिए पचास प्रतिशत हिस्सेदारी मिलाने की वजह से उनकी राजनीतिक चेतना स्वाभाविक रूप से बढ़ी है.

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उल्लेखनिय है की महिलाओ को सामान मताधिकार के लिए आन्दोलन में बिहार की महिलाओ ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया था. एनी बेसेंट ने १९१८ में पटना की एक सभा में ही कहा था की जब तक महिलाओ को मताधिकार नही मिलता, समाज का विकास नही हो सकता. १९१९ में पटना में अखिल भारतीय महिला सम्मलेन हुआ था जिसमे सामान मताधिकार की आवाज बुलंद हुई थी. इस सम्मेलन का परिणाम हुआ की १९२९ में बिहार और ओडीसा की महिलाओ को मताधिकार मिल गया.

यही नहीं देश की संसद जब महिलाओ को राजनीती में ३३ प्रतिशत आरक्षण देने के मसले पर बहस दर बहस में उलझी थी, तभी बिहार में स्थानीय निकायों में महिलाओ को पचास प्रतिशत आरक्षण मिल गया. यह आरक्षण एकल पदों पर भी लागू हुई जिससे महिलाए प्रखंड और जिला के विकास में कारगर हस्तक्षेप करने में सक्षम हो पाई है. पहले चरण में कुल ५८३ उम्मीदवारों में ५४ महिलाऐ थी. इस चरण में कुल मतदान ५७ प्रतिशत हुआ जिसमे पुरुष ५४.५ प्रतिशत और महिलाए ५९.५ थे. दूसरे चरण में ४५६ उम्मीदवारों में ३२ महिलाए थी. मतदान ५५ प्रतिशत हुआ जिसमे महिलाए ५७.५० प्रतिशत और पुरुष ५२.५० प्रतिशत रहे.

इलेक्शन वाच की यह रिपोर्ट भी गौरतलब है की तीसरे चरण के चुनावो में कुल ८०८ प्रत्याशियों में महिलाए केवल ७१ है. इन उम्मीदवारों में से २१५ पर आपराधिक मुक़दमे दर्ज है जिनमे महिला एक भी नही है. १६२ उम्मीदवारों पर हत्या जैसे आरोप में मामले है तो १२ प्रत्याशियों पर महिलायों पर अत्याचार के आरोप है.

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