” हम्मे आबे यहां नय रहभौं हो रवि ! “

५ नवम्बर की सुबह, ३ बजे। मोबाइल बजने लगी। मैं नींद में था। आशंका से मैं सिहर उठा। असमय फोन की घंटी थरथराहट पैदा करती है।मोबाइल की स्क्रीन पर नजर गयी- प्रभाकर पीजी। उधर से घबडायी हुई आवाज आयी- “ मेरी तबीयत बहुत खराब हो गयी है। कहॉं जाऊं?”मैंने कहा-“ फिलहाल ‘मंगलम्’ में भर्ती हो …

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