जिंदगी में घुला है मेरा गांव

बरवां, यही नाम है मेरे गांव का। आर्थिक रूप से पिछड़े सिद्धार्थनगर जिले का छोटा सा गांव, लेकिन जितनी अमीरी हमने अपने गांव में देखी, उतनी कहीं और दिखाई नहीं पड़ी। बचपन में जब होश संभाला तो चारों तरफ रिश्ते ही रिश्ते बिखरे थे। गांव के चाचा-चाचियां, काका-काकियां, दादा-दादियां। पूरा गांव जैसे एक परिवार हो। …

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