उजाले की उम्मीद में पथराई महाकवि की बेवा

-रमावती देवी की पीड़ा से अनजान हुए अपने-पराए पुरुषार्थ सिंह मऊ : ​सियासत अपना पीठ थपथपाने में लगी है। विकास के दावे हैं। इस बीच वीर रस के कवि की बेवा इस बात से हल्कान है कि न सिर्फ उसकी बल्कि  उसके परिवार,गांव की सुधि लेने वाला कोई न रहा। जी हां मैं बात कर …

उजाले की उम्मीद में पथराई महाकवि की बेवा Read More »