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समझ रहा है कॉरपोरेट इंडिया…भविष्य गांव का ही है

संकल्प सिन्हा तुलसी दास ने लिखा है धीरज धर्म मित्र अरु नारी। आपद काल परिखिअहिं चारी॥ अर्थात धैर्य, धर्म, मित्र और स्त्री- इन चारों की विपत्ति के समय ही परीक्षा होती है। लेकिन इस कोरोना रूपी महामारी के इस दौर में जब पूरा देश लॉक डाउन में था तो इन चारों की तो परीक्षा हो …

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प्रवासियों के स्वागत को कितना तैयार है गांव

डॉ प्रदीप कांत चौधरी आज लाखों-करोड़ों लोग सड़क पर हैं। कुछ चल रहे हैं, कुछ बैठे हैं। कुछ जान देकर भी अपने गांव पहुंच जाना चाहते हैं, कुछ शहरों में ही बैठ कर काम-धंधा शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं। तमाम सैद्धांतिक बहसों के बीच एक सवाल सबके मन को कुरेदती है : यदि गांव …

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