rural development institutions

जावली गांव: संत विरासत ले रही कलात्मक रूप

नन्दिनी सिंह अपने गांव की याद आते ही वास्तव में महसूस होता है कि अपनी जड़ों से लगाव क्या होता है। पंच भूतों से बना यह शरीर, पंच भूतों से ही बनी यह सृष्टि, इनका परस्पर संबंध हमें अपने गांव में ही महसूस होता है। मेरा गांव जावली भी राजस्थान में अलवर से करीब 50 …

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संपन्नता आई,पर जीवन का रंग चला गया

शिवमंगल सिंह वरिष्ठ पत्रकार गांव में बजुर्गों का डेरा, गलियों में सन्नाटे का पहरा, बुंदेलखण्ड के दूसरे गांवों जैसी हालत है अपने गांव का, हुलिया भी कुछ वैसा ही है। सुबह का उल्लास मायूसी में बदल गया है, गोधूलि की चहचहाहट को खामोशी ने अपने आगोश में ले लिया है। दोपहरी में भी सिर्फ सांय-सांय …

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गांधी का ग्राम स्वराज एक यूटोपिया सा लगता है…

गांधी जी जिस रामचरित मानस की प्रशंसा करते नहीं थकते थे, यह संपूर्ण इलाका उसी तुलसी दास के सांस्कृतिक ग्रहण से ग्रसित है। गांधी को गांव की कितनी पहचान थी और उसके सांस्कृतिक, आर्थिक, सामाजिक पक्ष से वे कितने वाकिफ थे, मुझे ठीक-ठीक नहीं मालूम। शायद उन्होंने चंपारण के गांव, कुछेक गुजरात, महाराष्ट्र और बंगाल …

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ग्रामीण विकास में है रूचि तो ‘इंटीग्रेटेड रूरल डेवलेपमेंट एंड मैनेजमेंट’ है बेहतर विकल्प

नयी दिल्ली: ग्रामीण विकास को समर्पित योजनाओं के सफल क्रियान्वयन के लिए हाल के दिनों में पेशेवरों की मांग बढ़ी है. गांव में लोगों को सरकारी योजनाओं की जानकारी, बैंकिंग सिस्टम की जानकारी, तथा कृषि क्षेत्र में घोषित नवीन वैज्ञानिक पद्दतियों की जानकारी देने के लिए कुशल पेशवरों की मांग बढ़ी है जो सरकारी तथा …

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