सूखती नदियों के बीच हलक तर करने की चिंता

अमरनाथ विशाला नदी के तट पर खड़ा हूं। इसी नदी के तट पर वैशाली नगर बसा। वैशाली का वैभव जैसे जैसे मिटता गया, विशाला सिकुडती गई और इसका नाम भी बाया हो गया। गंगा आज भी उत्तरवाहिनी होकर इसे अपने आगोष में समेटती है, पर बाया अर्थात विशाला में इस वर्ष कहीं-कहीं और छोटी-छोटी कूंडियों …

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