लॉक डाउन में गंगा हुई निर्मल, कृष्ण लीला का ग्वाह बनी यमुना भी हुई साफ

आलोक रंजन,युवा पत्रकार बनारस: सुन्दर सुभूमि भैया भारत के देशवा से, मोरे प्रान बसे गंगा धार रे बटोहिया. गंगा रे जमुनवा के झगमग पनिया से, सरजू झमकि लहरावे रे बटोहिया. ब्रह्मपुत्र पंचनद घहरत निशिदिन, सोनभद्र मीठे स्वर गावे रे बटोहिया. अपर अनेक नदी उमडि घुमडि नाचे, जुगन के जदुआ चलावे रे बटोहिया। इस कोरोना महामारी …

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