professor

” हम्मे आबे यहां नय रहभौं हो रवि ! “

५ नवम्बर की सुबह, ३ बजे। मोबाइल बजने लगी। मैं नींद में था। आशंका से मैं सिहर उठा। असमय फोन की घंटी थरथराहट पैदा करती है।मोबाइल की स्क्रीन पर नजर गयी- प्रभाकर पीजी। उधर से घबडायी हुई आवाज आयी- “ मेरी तबीयत बहुत खराब हो गयी है। कहॉं जाऊं?”मैंने कहा-“ फिलहाल ‘मंगलम्’ में भर्ती हो …

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पैंतीस वर्षों का प्रसंग है- कहां से शुरू करूं, कहां खत्म…डॉ योगेंद्र

अलविदा बंधु !आपके साथ थोड़ा मैं भी मर गया: प्रो पवन कुमार सिंह जाने माने शिक्षाविद, साहित्यकार और अंगचंपा के संपादक, हिन्दी विभाग, तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के प्रोफेसर व अंगिका भाषा के विभागाध्यक्ष डॉक्टर प्रेम प्रभाकर का देहांत आज सुबह दिल का दौरा पड़ने हो गया। वे 63 वर्ष के थे। प्रेम प्रभाकर के …

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