आंवले की छांव में अतीत की झलक

विजयालक्ष्मी ठाकुर कुंभ का समय चल रहा था तो ट्रेनें भी कोचमकोच भरी हुई जा रही थी। लेकिन मन में गंगा जी में डुबकी लगाने की इच्छा इतनी प्रबल थी कि प्रतापगढ़ की ओर जाने वाली कम भीड़ वाली ट्रेन में चल पड़े। ट्रेन तेजी से गांव दर गांव, कस्बा दर कस्बा होते हुए सुबह-सुबह …

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