prahalad singh patel

हम गांव के गंवार हैं साहिब

डॉक्टर सिद्धार्थ सोनकर गांव मतलब एक शहरी के लिए भौगोलिक रूप से पिछड़ा इलाका और मेरे जैसे लोगों के लिए गांव मतलब.क्या? आज तक गांव का मतलब नहीं निकाल पाया। इसलिए कहते रहे हैं कि “ गांव के गंवार है साहिब”। आज तक उसका ना कोई अर्थ समझ में आया है, ना कोई परिभाषा। बस …

हम गांव के गंवार हैं साहिब Read More »

पटकनिया:अपना गांव, अपनी पहचान

अपना गांव पटकनिया गाजीपुर जिला मुख्यालय से करीब 15 किमी की दूरी पर बसा-बसाया गया है। यह जमानिया तहसील के रेवतीपुर ब्लाक और सुहवल न्याय पंचायत का प्रमुख गांव है। अपने गांव का इतिहास करीब 250 साल पुराना है। इसके बसावट को देखकर पता लगाया जा सकता है कि यहां लोग जैसे-जैसे बाहर से आते …

पटकनिया:अपना गांव, अपनी पहचान Read More »

लोकशक्ति से होगा गांवों का विकास बशर्ते राजशक्ति करे लक्ष्मण रेखा का पालन

प्रो डाॅ आनंद कुमार हमारे देश के अधिकांश हिस्से में गांव बनाम शहर का दर्द कई कारणों से सुलझने की बजाय उलझता जा रहा है। गांव की तुलना में शहर का पलड़ा आर्थिक, सांस्कृतिक, सामाजिक और राजनीतिक दृष्टि से लगातार भारी हुआ है। गांधीजी की यह मान्यता थी कि भारत गांवों का देश है। अब …

लोकशक्ति से होगा गांवों का विकास बशर्ते राजशक्ति करे लक्ष्मण रेखा का पालन Read More »

गांधी का ग्राम स्वराज एक यूटोपिया सा लगता है…

गांधी जी जिस रामचरित मानस की प्रशंसा करते नहीं थकते थे, यह संपूर्ण इलाका उसी तुलसी दास के सांस्कृतिक ग्रहण से ग्रसित है। गांधी को गांव की कितनी पहचान थी और उसके सांस्कृतिक, आर्थिक, सामाजिक पक्ष से वे कितने वाकिफ थे, मुझे ठीक-ठीक नहीं मालूम। शायद उन्होंने चंपारण के गांव, कुछेक गुजरात, महाराष्ट्र और बंगाल …

गांधी का ग्राम स्वराज एक यूटोपिया सा लगता है… Read More »