लाख दुखों की एक दवा..सबसे उपर ग्राम सभा: रघुवंश प्रसाद सिंह

हम मेहनत कश जगवालों से.. अपना हिस्सा मांगेगे, इक खेत नहीं..इक देश नहीं हम अपना हिस्सा मांगेगे..फैज हम फैज की ये पंक्तियां जमीन हमारे आपकी, नहीं किसी के बाप की..जैसे नारों हो या गांव छोड़ब नहीं, खेत छोड़ब नाहीं, माई माटी छोड़ब नहीं, लड़ाई छोड़ब नहीं…..लड़ाई छोड़ब नहीं   जैसे संकल्प के साथ जंतर—मंतर पर …

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