दबंगता से जनता की हार का खतरा

अनुज कुमार सिन्हा वरिष्ठ संपादक,प्रभात खबर एक समय था, जब गांव-पंचायत में बड़े-बुजुर्गों की बात को लकीर माना जाता था. गांव के बिगड़ैल छोरे भी बड़े-बुजुर्गों की बात को नहीं काटते थे, उन्हें सम्मान देते थे. ये बड़े-बुजुर्ग ही मुखिया, सरपंच होते थे और हक से डांटते भी थे. अब समय बदल गया है. अब …

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