p v rajgopal

गांधी 150 वीं जयंती मनाते वक्त न भूलें बापू के सपने को…

पी वी राजगोपाल वर्तमान में विकास का ऐसा दौर चल रहा है जिसमें गांव भी बर्बाद हो रहे हैं, शहर भी बर्बाद हो रहे हैं। यानी हम ऐसे मॉडल में फंसे हैं जिसमें न गांव बचेगा और न शहर बचेगा। भारत के शहरों को देखिए तो वहां बेतरतीब तरीके से झुग्गी बस्तियां पसर रही हैं, …

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आजादी से आर्थिक आजादी की ओर …

निर्भय सिंह जब पहली बार सरवाही पहुचें तो पता चला यह गाँव पनिका समाज के बुनकरों का गाँव है। कुछ तो बुनाई कर रहे और कुछ तो टेलरिंग व शहरी मजदूरी व खेतीहर मजदूरी में लगे हैं। बुनाई का तो सामान खपरैल के उस कोने में रखा है, जहां एक कोने में खाना बनता है …

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आज़ादी की एक लड़ाई चम्बल की घाटी में

अंकित झा आज़ादी किसे पसंद नहीं है? सभी मनुष्य की आत्मा में निहित एक अधिकार आज़ादी. सभी बंधनों से मुक्ति, ना कोई शासक ना कोई शासन. स्वयं का स्वयं पर अधिकार. एक आज़ादी की लड़ाई चम्बल से.जाति संघर्ष के परे,वर्ग संघर्ष के परे. परन्तु सब को समाहित किये एक अनोखा संघर्ष. मध्य प्रदेश के चम्बल …

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बेपानी होते गांव..बेपरवाह होता समाज..सोती सरकार

जल और हल मिले साथ..तभी मिलेगी सूखे से राहत:योगेंद्र यादव सिर्फ राज्य ही नहीं समाज और समुदाय को भी पानी से जुड़े मुद्दों पर भागीदारी करनी चाहिए: राजेंद्र सिंह गांधी जी कहते थे 5 लाख स्वावलंबी गांव बनाना है तभी भारत बनेगा। और आप सोचो कि पांच लाख स्वावलंबी गांव बिना पानी का कैसा होगा। …

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