गांव ने जितना दिया..उसकी तुलना में गांव के लिए कहां कुछ कर पाई

आज मैं सोचती हूं कि अपने गांव की कितनी ऋणी हूं मैं, उसकी तुलना में गांव के लिए कहां कुछ कर पाई। फिर भी मैंने कुछ सकारात्मक जरुर किया है। किसी भी महिला से जब कोई पूछता है तुम्हारा गांव कहां है, तो वह पहले अपने मायके का नाम बताती है, फिर कुछ रुककर ससुराल …

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