बहुत बदला गांव, पर कुछ अनमोल खो गया

  हरिवंश ग्राम्य जीवन को गांधी ने भी नजदीक से देखा था और उनका सही निष्कर्ष था कि इन गांवों को स्वायत्त बनाकर विकसित करना ही भारत के हक में होगा। शायद गांव की सांस्कृतिक धारावाहिकता या पुरातनता के कारण ही मुहम्मद इकबाल को लिखना पड़ा- यूनां, मिस्र, रोमा, सब मिट गए जहां से, बाकी …

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