पैंतीस वर्षों का प्रसंग है- कहां से शुरू करूं, कहां खत्म…डॉ योगेंद्र

अलविदा बंधु !आपके साथ थोड़ा मैं भी मर गया: प्रो पवन कुमार सिंह जाने माने शिक्षाविद, साहित्यकार और अंगचंपा के संपादक, हिन्दी विभाग, तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के प्रोफेसर व अंगिका भाषा के विभागाध्यक्ष डॉक्टर प्रेम प्रभाकर का देहांत आज सुबह दिल का दौरा पड़ने हो गया। वे 63 वर्ष के थे। प्रेम प्रभाकर के …

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