industrialisation

समझ रहा है कॉरपोरेट इंडिया…भविष्य गांव का ही है

संकल्प सिन्हा तुलसी दास ने लिखा है धीरज धर्म मित्र अरु नारी। आपद काल परिखिअहिं चारी॥ अर्थात धैर्य, धर्म, मित्र और स्त्री- इन चारों की विपत्ति के समय ही परीक्षा होती है। लेकिन इस कोरोना रूपी महामारी के इस दौर में जब पूरा देश लॉक डाउन में था तो इन चारों की तो परीक्षा हो …

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विकास के वर्तमान अवधारणाओं में मूल परिवर्तन के बगैर आत्मनिर्भर भारत सिर्फ सपना

शिवाजी सिंह गांधी की ‘स्वदेशी’ की अवधारणा भारत के लिए बहुत ही प्रासंगिक है। अगर आज देश निर्णय कर ले कि हम स्वदेशी उत्पाद का ही उपयोग करेंगे तो इसके द्विआयामी परिणाम होंगे- नए रोजगार का सृजन होगा एवं आर्थिक असमानता घटेगी।   कोरोना महामारी के इस दौर में देश की आत्मनिर्भरता को लेकर एक नयी बहस …

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