hindi writer

प्रेमचंद का गांव….”लमही” ढूंढ़े नहीं मिलते होरी.. धनिया.. घिसू और माधव

चंद्रबिंद सिंह कथा सम्राट प्रेमचंद का गांव अर्थात ‘गोदान’ में चित्रित होरी का गांव। यदि किसी व्यक्ति की हिन्दी कथा-साहित्य में थोड़ी भी रुचि होगी तो वह कम से कम प्रेमचंद के कथा साहित्य से परिचित होगा और प्रेमचंद के कथा – संसार के लगभग पात्र ग्रामीण परिवेश से आते हैं। मेरी उन पात्रों के …

प्रेमचंद का गांव….”लमही” ढूंढ़े नहीं मिलते होरी.. धनिया.. घिसू और माधव Read More »

गांव ने जितना दिया..उसकी तुलना में गांव के लिए कहां कुछ कर पाई

आज मैं सोचती हूं कि अपने गांव की कितनी ऋणी हूं मैं, उसकी तुलना में गांव के लिए कहां कुछ कर पाई। फिर भी मैंने कुछ सकारात्मक जरुर किया है। किसी भी महिला से जब कोई पूछता है तुम्हारा गांव कहां है, तो वह पहले अपने मायके का नाम बताती है, फिर कुछ रुककर ससुराल …

गांव ने जितना दिया..उसकी तुलना में गांव के लिए कहां कुछ कर पाई Read More »

बदल गया है सामुदायिक जीवन

डॉ अनामिका मेरा जन्म चीन से युद्ध के समय हुआ था। उस समय की घटनाएं याद नहीं हैं। एक-दो दृश्य याद हैं। भैया हमको कहते थे कि चाइनीज है। मेरी नाक चपटी थी, इसलिए चिढ़ाते थे। हमको याद है कि नेपाल के बॉर्डर से आती थी एक बूढ़ी औरत, स्मगलिंग की साड़ियां लेकर। कुछ दूसरे …

बदल गया है सामुदायिक जीवन Read More »