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गांधी 150 वीं जयंती मनाते वक्त न भूलें बापू के सपने को…

पी वी राजगोपाल वर्तमान में विकास का ऐसा दौर चल रहा है जिसमें गांव भी बर्बाद हो रहे हैं, शहर भी बर्बाद हो रहे हैं। यानी हम ऐसे मॉडल में फंसे हैं जिसमें न गांव बचेगा और न शहर बचेगा। भारत के शहरों को देखिए तो वहां बेतरतीब तरीके से झुग्गी बस्तियां पसर रही हैं, …

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हाथों की कारीगरी को बाजार का संबल मिले तो बहुरेंगे कारीगरों के दिन

अंजली मिश्रा नयी दिल्ली: कां है मेला बला खिलौना, कलाकंद, लड्डू का दोना। चूं चूं गाने वाली चिलिया, चीं चीं करने वाली गुलिया। चावल खाने वाली चुहिया, चुनिया-मुनिया, मुन्ना भइया। लेकिन बदलते हुए दौर में तकनीक ने बच्चों के खेल का पूरा परिदृश्य बदल लिया है। अब वह टीवी से चिपका रहता है। उसे डोरेमौन …

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