Farmer sucide

बदलाव के बावजूद गांव के गांव होने पर संदेह की नहीं है गुंजाईश

डॉ आरकेे नीरद सावन का महीना उतार पर है। इस साल मॉनसून देर से आया है। बड़ी मिन्नत के बाद आए बादल बरसे, मगर इतना भी नहीं कि खेतों की प्यास पूरी-पूरी बुझ सके। खेतों की प्यास के न बुझने का सीधा मतलब है खेती पर संकट के बादल, किसानों की बेचैनी और गांव की …

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ऐसे तो नहीं रुकेंगी किसानों की आत्महत्याएं

के सी त्यागी,वरिष्ठ जद-यू नेता औद्योगिकीकरण, बाजारीकरण, विदेशी निवेश सभी जरूरी हैं, पर इस आड़ में खेती की जड़ कमजोर करना राष्ट्रीय क्षति होगी। ज्यादातर वे किसान आत्महत्या कर रहे हैं, जिन्होंने बैंकों से कर्ज ले रखा है, साहूकारों से नहीं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2014-2015 के दौरान आत्महत्या के …

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