कंक्रीट का जंगल उगाना तो ठीक पर्यावरण को दरकिनार कर नहीं बचेगा जीवन

डॉ रणविजय निषाद कालान्तर में भौतिक समृद्धि के साथ सम्पूर्ण विश्व उत्तरोत्तर प्रगतिपथ पर अग्रसर है, तो दूसरी तरफ हमारी उदात्त सभ्यता और संस्कृति से विमुखता, भोगवादी जीवनशैली के कारण जल-थल और वायुमण्डल पूर्णतयः संदूषित हो चुका है। वृक्षों की अंधाधुंध कटाई, जल का अतिशय दोहन, प्राकृतिक संसाधनों का अविवेकपूर्ण प्रबंधन तथा ईंट-भट्टों की अत्यधिक …

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