बाजार और ब्रांड के दबाव में शोषणकारी परंपरा से मुक्त होते गांव

गांधी के हिंद स्वराज की बार-बार चर्चा होती है और कहा जाता है कि यह ऐतिहासिक किताब है। मेरी राय थोड़ी अलग है। मेरी समझ से गांधी की दृष्टि न सिर्फ पिछड़ी हुई थी, अपितु मनुष्य विरोधी भी थी। गांधी एक तरफ छुआछूत मिटाने की बात करते थे, तो दूसरी तरफ वर्ण व्यवस्था के पक्षधर …

बाजार और ब्रांड के दबाव में शोषणकारी परंपरा से मुक्त होते गांव Read More »