…गांव में कितना बचा है गांव

रविशंकर सिंह बचपन तो बहुत पहले पीछे छूट गया था। बत्तीस बरस पहले गांव भी छूट गया, लेकिन जेहन में बचपन और गांव दोनों की यादें जिन्दा हैं। गांव के मेले-ठेले, तीज-त्योहार, नेवान-जेठौन (नवान्न-देव उत्थान ) बहुत याद आते हैं। जेठौन की रात में घर-घर जाकर परसादी खाना और उनके आँगन में बनी सुन्दर अल्पना …

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