याद किए गये रामसेवक बाबू

आलोक रंजन गया: लोकजीवन की ये कहावत आपने भी अक्सर सुनी होगी, बाढ़ै पूत पिता के धर्मे। खेती उपजै अपने कर्मे। अर्थात पुत्र पिता के धर्म से फलता-फूलता है और खेती अपने कर्म से अच्छी होती है। कुल मिला के ऐसी ही कहानी बनती है पूर्व प्रधानाचार्य रामसेवक सिंह की याद में मनाये जा रहे …

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