अपनी लोकोक्ति ओढ़े चल दिए विवेकी

हम उनके लिखे पर बहस चला सकते थे,उनके बहाने खुद गंभीर बन सकते थे,लेकिन तब हमें विवेकी राय के लेखन का मर्म न मिल पाता। ‘उन्नीस-बीस’ की लोकोक्ति, भोजपुरी पट्टी में दौड़ने वाली कहावत है। विवेकी राय ने अपने लेखन में इसका खूब प्रयोग किया है। उन्हें क्या मालूम था कि अपने अंतिम दिन वह …

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