गांव अगर खो गए, नहीं बचेगा देश और नहीं बचेगी संस्कृति

डॉ.राजश्री देवी गांव शब्द में ही एक अद्भुत आकर्षण है। गांव बोलते ही मन में हरे-भरे खेत, गाय-बैलों के चरने के लिए विशाल मैदान, पानी भरती औरतों का खिल-खिलाकर हंसना, शाम के समय नामघर (कीर्तनघर ) से आती शंख, घंटा, डबा की सम्मिलित मांगलिक ध्वनि, युवक-युवतियों का मिलकर मैदान में बरगद के नीचे बिहु नाचना, …

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