कृष्यै त्वा क्षेमाय त्वा रम्यै त्वा पोषाय त्वा

कमलेश कुमार सिंह पटना: मौजूदा दौर में गांव और किसानों के हालात। इसके लिए दो बातें। पहली बात आदी काल की। उसके बाद, बात वर्तमान परिदृश्य की। पहले बात, पुरानी। आदी काल में भारत में यह मान्यता रही है कि गांव एक स्वावलंबी और आत्मनिर्भर इकाई के रूप में विकसित हों। प्रारंभ से ही भारतीय …

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