मिशन इंद्रधनुष की सफलता में यूनिसेफ का अहम योगदान

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“बिहार के दानापुर की पार्वतिया अपने बच्चों को लेकर टीकाकरण केंद्र पहुंची है। पार्वतिया को याद नहीं कि उसके बचपन में उसकी मां उसे टीका लगवाई थी या नहीं लेकिन पार्वतिया टीके का महत्व समझती है । कहती है कि आशा दीदी ने टीका से होने वाला फायदा पूरी तरीके से बता दिया है। हमको भी पहिले ई लगता था कि कौन टीका लगवाये..इससे बुखार आ जाता है और बाकी भी बच्चा छोटा—छोटा है।

सबसे छोटका मंजय तो अभी गोद में लदा रहता है दो साल का हो गया। पार्वतिया कहती है कि वैसे तो सरकार नियमित टीकाकरण अभियान चलाती है लेकिन टीकाकरण केंद्र घर से दूर है इसलिए टीका कभी कभी छूट जाता है। पार्वतिया खुश है कि सरकार ने मिशन इंद्रधनुष शुरू किया है जिसमें वे बच्चे लिये जायेंगे जो नियमित अभियान में छूट गये हैं। पार्वतिया न सिर्फ अपने आई है बल्कि अपने साथ अपने गोतनी को भी ले आई है जिसके दो छोटे छोटे बच्चे हैं दो वर्ष से कम उम्र के। कहती है कि हम सब थोड़े न समझ हली टीकाकरण के महत्व..उ तो आशा दीदी बतयलथिन की इससे कैठो बीमारी से छुटकारा मिल सकहई। वैसे पार्वतिया को ई भी चिंता है कि मलिकार खेत से आयल होथिन..वो चाहती है कि उनके आने से पहले ही घर पहुंच जाये, ताकि घर के भी काम हो जाये। खैर मिशन इंद्रधनुष भले ही केंद्र सरकार ने शुरू किया है लेकिन लोगों तक इसकी जानकारी पहुंचाने में आशा और आंगनवाड़ी वर्करों के साथ यूनिसेफ का अहम योगदान है।”

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