स्वतंत्र सिंह ने घर आकर पुश्तैनी खेती को संभाला और प्रगतिशील किसानों में नाम दर्ज कराकर सर्वाधिक उपज वाले किसान का पुरस्कार भी प्राप्त किया। पारंम्परिक खेती के साथ स्वतंत्र सिंह ने व्यवसायिक खेती के बारे में सोचना शुरू किया। उनको लगा कि मशरूम उत्पादन का काम ठीक रहेगा। इस फील्ड में प्रतिस्पर्धा कम है। मशरूम की खेती कर देवरिया में व्यवसायिक खेती को बढ़ावा देने के लिए प्रगतिशील किसान बड़े पैमाने पर मशरूम उगा रहे हैं। बरहज तहसील के सोनाड़ी गांव निवासी स्वतंत्र सिंह अपनी उद्यमिता से न केवल किसानी के बदलाव की कहानी लिख रहे हैं, बल्कि जनपद के साढ़े तीन सौ किसानों की उम्मीद के किरण भी बन गए हैं।
प्रगति से संतुष्ट, लेकिन सरकार ने सहयोग नहीं किया
स्वतंत्र सिंह अपने समेत किसानों की प्रगति से संतुष्ट हैं। सरकार के रवैए से निराश हैं। उन्होंने कहा कि कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही जिले से हैं। उनको इस सम्बन्ध में अपनी योजनाओं से अवगत कराया। मेरी बात सरकार मान ले तो किसानों की आय तिगुनी हो जाएगी, लेकिन कृषि मंत्री की ओर से कोई ठोस पहल नहीं हुई।
पूर्व डीएम ने पहल की सराहना की थी
स्वतंत्र सिंह कहते हैं कि पूर्व में जिलाधिकारी रहे अमित किशोर ने मेरे प्रयासों को सराहा था और तीन दिवसीय ट्रेनिंग के लिए रहमानखेड़ा, लखनऊ भेजा था। उन्होंने ही विकास भवन गेट के सामने यह दुकान आवंटित की थी।
पहले करते थे ठेकेदारी
सोनाड़ी निवासी स्वतंत्र सिंह पहले ठेकेदारी करते थे। बच्चे बड़े हुए और पढ़ने के लिए बड़े शहरों का रुख कर लिए तो गांव पर बूढ़े माता-पिता के सेवा की जिम्मेदारी आन पड़ी। स्वतंत्र घर लौट आए।
हिमाचल के सोलन से लिया प्रशिक्षण
स्वतंत्र कहते हैं कि उन्होंने यूट्यूब पर मशरूम उत्पादन के बहुत वीडियो देखे, लेकिन तय किया कि इसके उत्पादन के प्रशिक्षण के लिए हिमाचल के सोलन जाएंगे। सोलन पहुंचकर वहां एक महीने का प्रशिक्षण प्राप्त किया।
उत्पादन के साथ बिक्री की चुनौती से जूझे
स्वतंत्र सिंह कहते हैं कि प्रशिक्षण के बाद गांव आकर छोटे पैमाने पर मशरूम उत्पादन शुरू किया। अब दिक्कत थी देहात में इसको लेकर किसी को कोई उत्साह नहीं था। अनेक डॉक्टरों के पास गए। उनको मशरूम दिया और लोगों में इसके फायदे बताने को कहा। डॉक्टरों ने कोराना काल में इम्यूटी बढ़ाने के लिए इसके सेवन के लिए भी लोगों को सलाह दी। नतीजन बिक्री बढ़ने लगी। देखा-देखी बहुत लोग मशरूम उत्पादन में रुचि लेने लगे।
ट्रेनिंग दी फिर किसानों का समूह बनाया
कोरोना काल में बड़ी संख्या में प्रवासी अपने घर गांव लौटे तो स्थानीय स्तर पर उनको रोजगार की चिंता होने लगी। ऐसे में स्वतंत्र ने उन्हें अपने घर पर ट्रेनिंग देना शुरू किया। बड़ी संख्या में युवा बेरोजगारों और स्थानीय किसान मशरूम का उत्पादन करने लगे। स्वतंत्र सिंह ने मशरूम उत्पादक किसानों का समूह बनाया और उनसे मशरूम खरीदकर बाहर भी भेजने लगे। कहते हैं कि आज के समय प्रतिदिन 2 क्विंटल से अधिक मशरूम बेचते हैं। किसानों की भी आमदनी बढ़ी है। बताते हैं कि लग्न के सीजन में 5 क्विंटल से अधिक की मांग हो जाती है। जिसे वे हरियाणा से मंगाकर पूरा करते हैं।
